{"count":17752,"next":"http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=json&page=81","previous":"http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=json&page=79","results":[{"id":11117,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/kavishala_logo.png","name":"पीयूष दईया","bio":"","raw_bio":null,"slug":"piyusa-daiya","DOB":"1973-09-27","DateOfDemise":null,"location":"बीकानेर, राजस्थान, भारत","url":"/sootradhar/piyusa-daiya","tags":null,"created":"2023-09-22T14:52:26.872895","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":null},{"id":11118,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/kavishala_logo.png","name":"पीयूष मिश्रा","bio":"","raw_bio":null,"slug":"piyusa-misra","DOB":"1963-09-13","DateOfDemise":null,"location":"ग्वालियर मध्य प्रदेश, भारत","url":"/sootradhar/piyusa-misra","tags":null,"created":"2023-09-22T14:52:39.290981","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":null},{"id":11119,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/kavishala_logo.png","name":"पीयूष वर्मा","bio":"","raw_bio":null,"slug":"piyusa-varma","DOB":"1947-09-01","DateOfDemise":null,"location":"इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत","url":"/sootradhar/piyusa-varma","tags":null,"created":"2023-09-22T12:17:22.545785","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":null},{"id":11120,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/kavishala_logo.png","name":"पीरज़ादा क़ासीम","bio":"","raw_bio":null,"slug":"pirazada-qasima","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"nan","url":"/sootradhar/pirazada-qasima","tags":null,"created":"2023-09-22T14:52:43.479537","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":null},{"id":11121,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/kavishala_logo.png","name":"पुरुषार्थवती देवी","bio":"","raw_bio":null,"slug":"purusarthavati-devi","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"दिल्ली","url":"/sootradhar/purusarthavati-devi","tags":null,"created":"2023-09-22T14:52:52.612787","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":null},{"id":11122,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/purshottam_agarwal.png","name":"पुरुषोत्तम अग्रवाल","bio":"इनका जन्म 25 अगस्त 1955 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ। इन्होंने १९७४ में महारानी लक्ष्मी बाई कॉलेज, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. १९७७ में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद भारतीय भाषा केंद्र, भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय[1], नई दिल्ली से हिंदी में एम॰ए॰(हिंदी साहित्य 1979) और एम.फिल की उपाधियाँ प्राप्त कीं. अग्रवाल को १९८५ में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली ने हिंदी के प्रसिद्द आलोचक नामवर सिंह के निर्देशन में 'कबीर की भक्ति का सामाजिक अर्थ' विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्रदान की.\r\n\r\n1982-90 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में अध्यापन के बाद पुरुषोत्तम अग्रवाल की नियुक्ति उसी भारतीय भाषा केंद्र में एसोशिएट प्रोफ़ेसर के रूप में हुई जहाँ से इन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। २००३ में ये यहीं पर प्रोफेसर और केंद्र के अध्यक्ष बने. प्रतिभाशाली प्राध्यापक के रूप में वे विद्यार्थियों में बहुत लोकप्रिय रहे. २००५ से २००७ तक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान परिषद् (एनसीईआरटी) की हिंदी पाठ्यक्रम निर्माण समिति (छठवीं कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के लिए) के प्रमुख सलाहकार भी रहे.\r\n\r\nपुरुषोत्तम अग्रवाल कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम के फैकल्टी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में ब्रिटिश अकैडमी विजिटिंग प्रोफेसर रहे. २००२ में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ही वोल्फसन कॉलेज के फेलो के रूप में कार्य किया। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ‘वर्तमान भारतीय राजनीति में अस्मिता विमर्श’ विषय पर दो संगोष्ठियों का संचालन किया। मई से जुलाई, २००२ के बीच वे नेशनल कॉलेज ऑफ मैक्सिको, मैक्सिको सिटी में विजिटिंग प्रोफ़ेसर रहे. भारतीय इतिहास और संस्कृति के विभिन्न विषयों पर चार संगोष्ठियों का संचालन किया। नवंबर-दिसंबर, २००४ के दौरान अमरीका की अपनी अकादमिक यात्रा में इन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयार्क; इमोरी विश्वविद्यालय, अटलांटा; राइस विश्वविद्यालय, हॉस्टन में विभिन्न विषयों पर भाषण दिए. अमेरिकन एकेडमी ऑफ रिलीजन के निमंत्रण पर अटलांटा में कबीर की भक्ति संवेदना पर इंटरनेशनल एसोसियेशन ऑफ हिस्टोरियंस ऑफ रिलीजंस की वार्षिक सभा में निबंध पाठ. इमोरी विश्वविद्यालय के हेल इंस्टीट्युट ने इनके सम्मान में लंच पर एक सभा का आयोजन किया। इस सभा में पुरुषोत्तम अग्रवाल ने चुनाव के बाद के भारतीय परिदृश्य पर चर्चा की.इसके अतिरिक्त हाइडेलबर्ग, फ्रैंकफर्ट, बैंकाक, लन्दन, पेरिस, कोलम्बो, येरेवान, अस्त्राखान की अकादमिक, व्याख्यान और शोध यात्रायें कीं.\r\n\r\n२ जुलाई २००७ को भारत सरकार ने पुरुषोत्तम अग्रवाल को संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य मनोनीत किया। तब से लेकर अब तक वे इस पद पर बने हुए हैं।\r\n\r\nइस दौरान इनकी छवि एक लोक बुद्धिजीवी की बनी. सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों पर टी.वी. पर बहसों से वे देशभर में लोकप्रिय हुए. आज एक लोक बुद्धिजीवी के रूप में प्रोफेसर अग्रवाल का महत्त्व निर्विवाद है।","raw_bio":"इनका जन्म 25 अगस्त 1955 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ। इन्होंने १९७४ में महारानी लक्ष्मी बाई कॉलेज, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. १९७७ में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद भारतीय भाषा केंद्र, भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय[1], नई दिल्ली से हिंदी में एम॰ए॰(हिंदी साहित्य 1979) और एम.फिल की उपाधियाँ प्राप्त कीं. अग्रवाल को १९८५ में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली ने हिंदी के प्रसिद्द आलोचक नामवर सिंह के निर्देशन में 'कबीर की भक्ति का सामाजिक अर्थ' विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्रदान की.\r \r 1982-90 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में अध्यापन के बाद पुरुषोत्तम अग्रवाल की नियुक्ति उसी भारतीय भाषा केंद्र में एसोशिएट प्रोफ़ेसर के रूप में हुई जहाँ से इन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। २००३ में ये यहीं पर प्रोफेसर और केंद्र के अध्यक्ष बने. प्रतिभाशाली प्राध्यापक के रूप में वे विद्यार्थियों में बहुत लोकप्रिय रहे. २००५ से २००७ तक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान परिषद् (एनसीईआरटी) की हिंदी पाठ्यक्रम निर्माण समिति (छठवीं कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के लिए) के प्रमुख सलाहकार भी रहे.\r \r पुरुषोत्तम अग्रवाल कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम के फैकल्टी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में ब्रिटिश अकैडमी विजिटिंग प्रोफेसर रहे. २००२ में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ही वोल्फसन कॉलेज के फेलो के रूप में कार्य किया। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ‘वर्तमान भारतीय राजनीति में अस्मिता विमर्श’ विषय पर दो संगोष्ठियों का संचालन किया। मई से जुलाई, २००२ के बीच वे नेशनल कॉलेज ऑफ मैक्सिको, मैक्सिको सिटी में विजिटिंग प्रोफ़ेसर रहे. भारतीय इतिहास और संस्कृति के विभिन्न विषयों पर चार संगोष्ठियों का संचालन किया। नवंबर-दिसंबर, २००४ के दौरान अमरीका की अपनी अकादमिक यात्रा में इन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयार्क; 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font-size: 24px;\"> The Great Poets and Writers in Indian and World History! </p>","image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_description/black.jpg"}