{"count":17752,"next":"http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=json&page=707","previous":"http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=json&page=705","results":[{"id":28622,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A4_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%B6.png","name":"स्मृति प्रशा","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।</p>  ","raw_bio":"नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।  ","slug":"smrti-prasa","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"","url":"/sootradhar/smrti-prasa","tags":"","created":"2024-01-11T16:49:36.863605","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28623,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%A7_%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%9A%E0%A4%A6.png","name":"समृद्धि मनचंदा","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी की कवयित्री।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> समृद्धि मनचंदा</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span>दिल्ली</span\r\n</div> <br> <p>05 फ़रवरी 1985 को दिल्ली में जन्मीं समृद्धि मनचंदा नई पीढ़ी की कवयित्री हैं जो सदानीरा पत्रिका सहित विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित हो रही हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं। कुछ वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापन के बाद वह इन दिनों एक स्कूल में अध्यापिका हैं। प्रेम और स्त्री-विमर्श जैसे विषयों के इर्द-गिर्द उनकी अभिव्यक्ति अपने अनुभवों की तलाश करती नज़र आती हैं।<br/","raw_bio":"नई पीढ़ी की कवयित्री।     मूल नाम :  समृद्धि मनचंदा जन्म : दिल्ली     05 फ़रवरी 1985 को दिल्ली में जन्मीं समृद्धि मनचंदा नई पीढ़ी की कवयित्री हैं जो सदानीरा पत्रिका सहित विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित हो रही हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं। कुछ वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापन के बाद वह इन दिनों एक स्कूल में अध्यापिका हैं। प्रेम और स्त्री-विमर्श जैसे विषयों के इर्द-गिर्द उनकी अभिव्यक्ति अपने अनुभवों की तलाश करती नज़र आती हैं।","slug":"samrddhi-manacanda","DOB":"1985-02-05","DateOfDemise":null,"location":"दिल्ली","url":"/sootradhar/samrddhi-manacanda","tags":"स्त्री कवि,नई कविता,नई पीढ़ी","created":"2024-01-15T12:02:08.829793","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28624,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A8_%E0%A4%AE%E0%A4%B6%E0%A4%B0.png","name":"सुमन मिश्र","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-लेखक। ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> सुमन मिश्र</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 14/08/1982</bdi> | लखीसराय, बिहार</span\r\n</div> <br> <p","raw_bio":"नई पीढ़ी के कवि-लेखक। ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध।     मूल नाम :  सुमन मिश्र जन्म :  14/08/1982  | लखीसराय, बिहार    ","slug":"sumana-misra","DOB":"1982-08-14","DateOfDemise":null,"location":"लखीसराय, बिहार","url":"/sootradhar/sumana-misra","tags":"नई कविता,नई पीढ़ी","created":"2024-01-11T16:49:38.353585","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28625,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A8_%E0%A4%B0%E0%A4%9C.png","name":"सुमन राजे","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित कवयित्री और आलोचक। 'चौथा सप्तक’ में शामिल।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 23/08/1938</bdi> | लखनऊ, उत्तर प्रदेश</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 26/12/2008</bdi> | लखनऊ, उत्तर प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p>सुमन राजे का जन्म 23 अगस्त, 1938 को उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य में लखनऊ और कानपूर विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वह प्राध्यापन से जुड़ी रहीं और प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुईं। <br/><br/>उनका प्रथम परिचय ‘चौथा सप्तक’ की कवयित्री के रूप में है। इसके अतिरिक्त उनकी कविताएँ ‘सपना और लाशघर’, ‘उगे हुए हाथों के जंगल’, ‘यात्रादंश’, ‘एरका’, ‘इक्कीसवीं सदी का गीत’, ‘युद्ध 2007’ शीर्षक संग्रहों में प्रकाशित हैं। <br/><br/>हिंदी साहित्येतिहास के निर्माण में उनका योगदान अध्ययन का विषय रहा है। इस क्रम में ‘साहित्येतिहास: संरचना और स्वरूप’, ‘साहित्येतिहास: आदिकाल’, ‘हिंदी साहित्य का आधा इतिहास’ और ‘इतिहास में स्त्री’ उनकी प्रमुख कृति है। ‘काव्यरूप संरचना: उद्भव और विकास’, ‘रचना की कार्यशाला’ उनकी आलोचना-कृतियाँ हैं। ‘रेवातट’, ‘आदिकालीन काव्यधारा’, ‘अपभ्रंश पीठिका’, ‘बीसवीं सदी का हिंदी महिला लेखन’ संपादित पाठ के रूप में प्रकाशित हैं। <br/><br/>उन्हें तुलसी पुरस्कार, आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरास्कार आदि से सम्मानित किया गया। <br/","raw_bio":"सुपरिचित कवयित्री और आलोचक। 'चौथा सप्तक’ में शामिल।     जन्म :  23/08/1938  | लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन :  26/12/2008  | लखनऊ, उत्तर प्रदेश     सुमन राजे का जन्म 23 अगस्त, 1938 को उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य में लखनऊ और कानपूर विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वह प्राध्यापन से जुड़ी रहीं और प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुईं।  उनका प्रथम परिचय ‘चौथा सप्तक’ की कवयित्री के रूप में है। इसके अतिरिक्त उनकी कविताएँ ‘सपना और लाशघर’, ‘उगे हुए हाथों के जंगल’, ‘यात्रादंश’, ‘एरका’, ‘इक्कीसवीं सदी का गीत’, ‘युद्ध 2007’ शीर्षक संग्रहों में प्रकाशित हैं।  हिंदी साहित्येतिहास के निर्माण में उनका योगदान अध्ययन का विषय रहा है। इस क्रम में ‘साहित्येतिहास: संरचना और स्वरूप’, ‘साहित्येतिहास: आदिकाल’, ‘हिंदी साहित्य का आधा इतिहास’ और ‘इतिहास में स्त्री’ उनकी प्रमुख कृति है। ‘काव्यरूप संरचना: उद्भव और विकास’, ‘रचना की कार्यशाला’ उनकी आलोचना-कृतियाँ हैं। ‘रेवातट’, ‘आदिकालीन काव्यधारा’, ‘अपभ्रंश पीठिका’, ‘बीसवीं सदी का हिंदी महिला लेखन’ संपादित पाठ के रूप में प्रकाशित हैं।  उन्हें तुलसी पुरस्कार, आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरास्कार आदि से सम्मानित किया गया। ","slug":"sumana-raje","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"लखनऊ, उत्तर प्रदेश","url":"/sootradhar/sumana-raje","tags":"स्त्री कवि,प्रगतिशील कविता,नई कविता","created":"2024-01-11T16:49:39.037426","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28626,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0_%E0%A4%B8%E0%A4%B9_%E0%A4%B0%E0%A4%A0%E0%A4%A1.png","name":"सुमेर सिंह राठौड़","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 12/02/1994</bdi> | जैसलमेर, राजस्थान</span></p>\r\n</div> <br> <p>1994 में जैसलमेर में जन्मे नई पीढ़ी के कवि सुमेर सिंह राठौड़ गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विधिवत ढंग से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद ग़ैर-विधिवत ढंग से पत्रकारिता की है। एक अनिवार्य युवा-आवेग और बेचैनियों और भटकनों के साथ उनके दिखाए-लिखे ने इधर देखने-पढ़ने वाले संसार को अचरज से भरा है। सुमेर फिलहाल दृश्यों और गद्य में ख़ुद को और अपने समीप को व्यक्त कर रहे हैं। वह हिंदी की गुरु-शिष्य परंपराओं, झोलाउठाऊ मानसिकताओं और कैसे भी एक रोज़गार पाकर ख़ुद को उसमें बर्बाद कर देने के अभ्यास से दूर हैं। जैसलमेर में रहते हैं और दिल्ली से आवाजाही का संबंध जोड़ रखा है","raw_bio":"नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय    जन्म :  12/02/1994  | जैसलमेर, राजस्थान       1994 में जैसलमेर में जन्मे नई पीढ़ी के कवि सुमेर सिंह राठौड़ गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विधिवत ढंग से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद ग़ैर-विधिवत ढंग से पत्रकारिता की है। एक अनिवार्य युवा-आवेग और बेचैनियों और भटकनों के साथ उनके दिखाए-लिखे ने इधर देखने-पढ़ने वाले संसार को अचरज से भरा है। सुमेर फिलहाल दृश्यों और गद्य में ख़ुद को और अपने समीप को व्यक्त कर रहे हैं। वह हिंदी की गुरु-शिष्य परंपराओं, झोलाउठाऊ मानसिकताओं और कैसे भी एक रोज़गार पाकर ख़ुद को उसमें बर्बाद कर देने के अभ्यास से दूर हैं। जैसलमेर में रहते हैं और दिल्ली से आवाजाही का संबंध जोड़ रखा है","slug":"sumera-sinha-rathaura","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"जैसलमेर, राजस्थान","url":"/sootradhar/sumera-sinha-rathaura","tags":"नई कविता,नई पीढ़ी","created":"2024-01-11T16:49:41.880040","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28627,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%A5_%E0%A4%B5%E0%A4%B6%E0%A4%B7%E0%A4%A0.png","name":"समर्थ वाशिष्ठ","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 10/06/1983</bdi> | पटियाला, पंजाब</span></p>\r\n</div> <br> <p>समर्थ वाशिष्ठ का जन्म 1983 में एक साहित्यिक परिवार में हुआ। उनके दादा खुशीराम वशिष्ठ हरियाणा के ‘राज्य कवि’ की उपाधि से विभूषित थे और उनके पिता जितेंद्र वशिष्ठ भी एक सुपरिचित कवि थे। हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि और संस्मरणकार शैलेंद्र शैल उनके मामा हैं। <br/>वह हिंदी और अँग्रेज़ी दोनों भाषाओं में समान रूप से लेखन कर रहे हैं। उनकी अँग्रेज़ी कविताओं के दो संग्रह उनके युवपन में ही प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि हिंदी कविताओं का संग्रह वर्ष 2017 में ‘सपने में पिया रानी’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। उनकी अँग्रेज़ी और हिंदी कविताओं का विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। <br/>मौलिक लेखन के अलावे उन्होंने अनुवाद में भी सक्रियता रखी है। इस क्रम में उन्होंने सौमित्र मोहन की प्रसिद्ध लंबी कविता लुक़मान अली के अँग्रेज़ी अनुवाद में सहयोग किया है और लंग्स्टन ह्यूज की कविताओं का हिंदी अनुवाद किया है। उन्होंने पाश, व्योमेश शुक्ल और असद ज़ैदी की हिंदी कविताओं के अँग्रेज़ी अनुवाद भी किए हैं।   ","raw_bio":"नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।     जन्म :  10/06/1983  | पटियाला, पंजाब       समर्थ वाशिष्ठ का जन्म 1983 में एक साहित्यिक परिवार में हुआ। उनके दादा खुशीराम वशिष्ठ हरियाणा के ‘राज्य कवि’ की उपाधि से विभूषित थे और उनके पिता जितेंद्र वशिष्ठ भी एक सुपरिचित कवि थे। हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि और संस्मरणकार शैलेंद्र शैल उनके मामा हैं।  वह हिंदी और अँग्रेज़ी दोनों भाषाओं में समान रूप से लेखन कर रहे हैं। उनकी अँग्रेज़ी कविताओं के दो संग्रह उनके युवपन में ही प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि हिंदी कविताओं का संग्रह वर्ष 2017 में ‘सपने में पिया रानी’ शीर्षक से 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","raw_bio":null,"slug":"sumitrakumari-sinha","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"","url":"/sootradhar/sumitrakumari-sinha","tags":"","created":"2024-01-11T16:49:43.458525","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28630,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%A8_%E0%A4%AA%E0%A4%A4.png","name":"सुमित्रानंदन पंत","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">छायावाद के आधार स्तंभों में से एक। 'प्रकृति के सुकुमार' कवि। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> सुमित्रानंदन पंत</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 20/05/1900</bdi> | कौसानी, उत्तराखंड</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 28/12/1977</bdi> | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p>‘प्रकृति के सुकुमार कवि’ सुमित्रानंदन पंत का जन्म बागेश्वर ज़िले के कौसानी (वर्तमान उत्तराखंड) में 20 मई 1900 को हुआ। जन्म के कुछ ही घंटों बाद उनकी माता की मृत्यु हो गई और उनका लालन-पालन उनकी दादी ने किया। बचपन में उनका नाम गोसाईं दत्त रखा गया था। प्रयाग में उच्च शिक्षा के दौरान 1921 के असहयोग आंदोलन में महात्मा गाँधी के बहिष्कार के आह्वान पर उन्होंने महाविद्यालय छोड़ दिया और हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अँग्रेज़ी भाषा-साहित्य के स्वाध्याय में लग गए। <br/><br/>उनकी काव्य-चेतना का विकास प्रयाग में ही हुआ, हालाँकि नियमित रूप से कविताएँ वह किशोर आयु से ही लिखने लगे थे। उनका रचनाकाल 1916 से 1977 तक लगभग 60 वर्षों तक विस्तृत है। उनकी काव्य-यात्रा के तीन चरण देखे जाते हैं। 1916-35 का पहला चरण छायावादी काव्य का है जिस दौरान ‘वीणा’, ‘ग्रंथि’, ‘पल्लव’, ‘गुंजन’ तथा ‘ज्योत्स्ना’ संग्रह प्रकाशित हुए। ‘पल्लव’ छायावादी सर्जनात्मकता का चरम उत्कर्ष है और इस संग्रह को उनकी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रस्फुटन माना जाता है। दूसरा चरण प्रगतिवादी काव्य का है जब मार्क्स और फ़्रायड के प्रभाव में वह सौंदर्य-चेतना से बाहर निकल आम हाड़-माँस के आदमी की पहचान का प्रयास करते हैं। इस दौर में उनके ‘युगांत’, ‘गुण-वाणी’ और ‘ग्राम्या’ संग्रह प्रकाशित हुए। तीसरी धारा अध्यात्मवाद की है जब वह अरविंद-दर्शन के प्रभाव में आए। ‘स्वर्ण-धूलि’, ‘अतिमा’, ‘रजत शिखर’ और ‘लोकायतन’ इस चरण के संग्रह हैं जहाँ वह अध्यात्मवादी भावलोक में विचरण करते हैं।  <br/><br/>‘युगांतर’, ‘स्वर्णकिरण’, ‘कला और बूढ़ा चाँद’, ‘सत्यकाम’, ‘मुक्ति यज्ञ’, ‘तारापथ’, ‘मानसी’, ‘युगवाणी’, ‘उत्तरा’, ‘रजतशिखर’, ‘शिल्पी’, ‘सौवर्ण’, ‘पतझड़’, ‘अवगुंठित’, ‘मेघनाद वध’ आदि उनके अन्य प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। ‘चिदंबरा’ संग्रह का प्रकाशन 1958 में हुआ जिसमें 1937 से 1950 तक की रचनाओं का संचयन है। कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने नाटक, उपन्यास, निबंध और अनुवाद में भी योगदान किया है।<br/><br/>उन्हें 1960 में 'कला और बूढ़ा चाँद' काव्य-संग्रह के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से और 1968 में ‘चिदंबरा’ काव्य-संग्रह के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया और उनपर डाक टिकट जारी किया है।  <br/><br/>कौसानी गाँव के उनके घर को 'सुमित्रा नंदन पंत साहित्यिक वीथिका' नामक संग्रहालय में परिणत किया गया है जहाँ उनकी व्यक्तिगत चीज़ों, प्रशस्तिपत्र, विभिन्न संग्रहों की पांडुलिपियों को सुरक्षित रखा गया है। संग्रहालय में उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष ‘पंत व्याख्यान माला’ का आयोजन किया जाता है।<br/","raw_bio":"छायावाद के आधार स्तंभों में से एक। 'प्रकृति के सुकुमार' कवि। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित।     मूल नाम :  सुमित्रानंदन पंत जन्म :  20/05/1900  | कौसानी, उत्तराखंड निधन :  28/12/1977  | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश     ‘प्रकृति के सुकुमार कवि’ सुमित्रानंदन पंत का जन्म बागेश्वर ज़िले के कौसानी (वर्तमान उत्तराखंड) में 20 मई 1900 को हुआ। जन्म के कुछ ही घंटों बाद उनकी माता की मृत्यु हो गई और उनका लालन-पालन उनकी दादी ने किया। बचपन में उनका नाम गोसाईं दत्त रखा गया था। प्रयाग में उच्च शिक्षा के दौरान 1921 के असहयोग आंदोलन में महात्मा गाँधी के बहिष्कार के आह्वान पर उन्होंने महाविद्यालय छोड़ दिया और हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अँग्रेज़ी भाषा-साहित्य के स्वाध्याय में लग गए।  उनकी काव्य-चेतना का विकास प्रयाग में ही हुआ, हालाँकि नियमित रूप से कविताएँ वह किशोर आयु से ही लिखने लगे थे। उनका रचनाकाल 1916 से 1977 तक लगभग 60 वर्षों तक विस्तृत है। उनकी काव्य-यात्रा के तीन चरण देखे जाते हैं। 1916-35 का पहला चरण छायावादी काव्य का है जिस दौरान ‘वीणा’, ‘ग्रंथि’, ‘पल्लव’, ‘गुंजन’ तथा ‘ज्योत्स्ना’ संग्रह प्रकाशित हुए। ‘पल्लव’ छायावादी सर्जनात्मकता का चरम उत्कर्ष है और इस संग्रह को उनकी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रस्फुटन माना जाता है। दूसरा चरण प्रगतिवादी काव्य का है जब मार्क्स और फ़्रायड के प्रभाव में वह सौंदर्य-चेतना से बाहर निकल आम हाड़-माँस के आदमी की पहचान का प्रयास करते हैं। इस दौर में उनके ‘युगांत’, ‘गुण-वाणी’ और ‘ग्राम्या’ संग्रह प्रकाशित हुए। तीसरी धारा अध्यात्मवाद की है जब वह अरविंद-दर्शन के प्रभाव में आए। ‘स्वर्ण-धूलि’, ‘अतिमा’, ‘रजत शिखर’ और ‘लोकायतन’ इस चरण के संग्रह हैं जहाँ वह अध्यात्मवादी भावलोक में विचरण करते हैं।   ‘युगांतर’, ‘स्वर्णकिरण’, ‘कला और बूढ़ा चाँद’, ‘सत्यकाम’, ‘मुक्ति यज्ञ’, ‘तारापथ’, ‘मानसी’, ‘युगवाणी’, ‘उत्तरा’, ‘रजतशिखर’, ‘शिल्पी’, ‘सौवर्ण’, ‘पतझड़’, ‘अवगुंठित’, ‘मेघनाद वध’ आदि उनके अन्य प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। ‘चिदंबरा’ संग्रह का प्रकाशन 1958 में हुआ जिसमें 1937 से 1950 तक की रचनाओं का संचयन है। कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने नाटक, उपन्यास, निबंध और अनुवाद में भी योगदान किया है। उन्हें 1960 में 'कला और बूढ़ा चाँद' काव्य-संग्रह के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से और 1968 में ‘चिदंबरा’ काव्य-संग्रह के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया और उनपर डाक टिकट जारी किया है।   कौसानी गाँव के उनके घर को 'सुमित्रा नंदन पंत साहित्यिक वीथिका' नामक संग्रहालय में परिणत किया गया है जहाँ उनकी व्यक्तिगत चीज़ों, प्रशस्तिपत्र, विभिन्न संग्रहों की पांडुलिपियों को सुरक्षित रखा गया है। संग्रहालय में उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष ‘पंत व्याख्यान माला’ का आयोजन किया जाता है।","slug":"sumitranandana-panta","DOB":"1900-05-20","DateOfDemise":"1977-12-28","location":"कौसानी, उत्तराखंड","url":"/sootradhar/sumitranandana-panta","tags":"गांधीवादी कवि,छायावाद","created":"2024-01-11T16:49:44.042988","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28631,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A4%B9.png","name":"स्मिता सिन्हा","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी की कवयित्री।</p>  ","raw_bio":"नई पीढ़ी की कवयित्री।  ","slug":"smita-sinha","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"पटना, बिहार","url":"/sootradhar/smita-sinha","tags":"","created":"2024-01-11T16:49:44.786812","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":28632,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0_%E0%A4%A4%E0%A4%A4.png","name":"समीर ताँती","bio":"<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित असमिया कवि-कथाकार-अनुवादक।</p>  ","raw_bio":"सुपरिचित असमिया कवि-कथाकार-अनुवादक।  ","slug":"samira-tamti","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"कार्बी आंगलोंग, 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