{"count":17752,"next":"http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=json&page=639","previous":"http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=json&page=637","results":[{"id":10526,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kkk.jpg","name":"Kishor Kabra(किशोर काबरा)","bio":"<p>डॉ॰ किशोर काबरा (जन्म : २६ दिसम्बर १९३४) हिन्दी कवि हैं। साठोत्तरी हिन्दी-कविता के शीर्षस्थ हस्ताक्षरों में उनका महत्वपूर्ण स्थान है। काबरा जी मूलत: कवि हैं, साथ ही निबन्धकार, आलोचक, कहानीकार, शब्द-चित्रकार, अनुवादक एवं संपादक भी हैं। आपक की गद्य-प्रतिभा लघुकथाओं और प्रबंध-काव्यों तक व्याप्त है। आपका कवित्व कवि-सम्मेलनों के श्रोताओं से लेकर पाठकों की हृदयभूमि तक प्रतिष्ठित है।</p>\r\n<p>Dr. Kishore Kabra (born: 26 December 1934) is a Hindi poet. He has an important place in the top signatures of Satotri Hindi-poetry. Kabra ji is basically a poet, as well as an essayist, critic, story writer, word painter, translator and editor. Your prose-talent is widespread in short stories and management-poems. Your poetry is revered from the listeners of poet-sammelans to the heartland of the readers.</p>","raw_bio":"डॉ॰ किशोर काबरा (जन्म : २६ दिसम्बर १९३४) हिन्दी कवि हैं। साठोत्तरी हिन्दी-कविता के शीर्षस्थ हस्ताक्षरों में उनका महत्वपूर्ण स्थान है। काबरा जी मूलत: कवि हैं, साथ ही निबन्धकार, आलोचक, कहानीकार, शब्द-चित्रकार, अनुवादक एवं संपादक भी हैं। आपक की गद्य-प्रतिभा लघुकथाओं और प्रबंध-काव्यों तक व्याप्त है। आपका कवित्व कवि-सम्मेलनों के श्रोताओं से लेकर पाठकों की हृदयभूमि तक प्रतिष्ठित है।   Dr. Kishore Kabra (born: 26 December 1934) is a Hindi poet. He has an important place in the top signatures of Satotri Hindi-poetry. Kabra ji is basically a poet, as well as an essayist, critic, story writer, word painter, translator and editor. Your prose-talent is widespread in short stories and management-poems. 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स्थान\tहाली-ऊझटी, दरभंगा, बिहार, भारत<br>\r\n कुछ प्रमुख कृतियाँ:\r\nसुदामा चरित, द्रौपदी-पुकार, हनुमान-रावण-संवाद, बनगाँव वर्णन आदि लघु-काव्य। कुछ कवित्त और सवैये भी।<br>\r\n विविध:\r\nआशुकवि के रूप में ख्याति। भक्तकवि माने जाते हैं। छत्रपति, नाथ, कविदत्त, कवीश्वरदत्त आदि नामों से भी रचनाएँ उपलब्ध। जनश्रुति है कि निरक्षर थे और महादेव की कृपा से कवि बने थे। मैथिली के कवि।<br>","raw_bio":"जन्म:\tअठारहवीं शताब्दी  \r  जन्म स्थान\tहाली-ऊझटी, दरभंगा, बिहार, भारत \r  कुछ प्रमुख कृतियाँ:\r सुदामा चरित, द्रौपदी-पुकार, हनुमान-रावण-संवाद, बनगाँव वर्णन आदि लघु-काव्य। कुछ कवित्त और सवैये भी। \r  विविध:\r आशुकवि के रूप में ख्याति। भक्तकवि माने जाते हैं। छत्रपति, नाथ, कविदत्त, कवीश्वरदत्त आदि नामों से भी रचनाएँ उपलब्ध। जनश्रुति है कि निरक्षर थे और महादेव की कृपा से कवि बने थे। मैथिली के कवि।","slug":"chatranatha","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"हाली-ऊझटी, दरभंगा, बिहार, भारत","url":"/sootradhar/chatranatha","tags":"","created":"2023-09-22T12:18:46.709754","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4},{"id":10731,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/male.png","name":"छवि","bio":"तारे भये कारे तेरे नैन रतनारे भये ,<br>\r\nमोती भये सीरे तू न सीरी अजहूँ भई ।<br>\r\nछवि कहै पति मै चकैया मिली तू न मिली ,<br>\r\nठौया तरु छूटी तेरी टेक ना छुटी दई ।<br>\r\nअरुनई नई तेरी अरुनई नई भई ,<br>\r\nचहचही बोली आली तू न बोली ऎबई ।<br>\r\nमँद छबि भए चँद फूले अरविँद बृँद ,<br>\r\nगई री विभावरी न रिस रावरी गई ।<br>\r\n<br>\r\n\r\nछवि का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल मेहरोत्रा के संग्रह से उपलब्ध हुआ है।<br>","raw_bio":"तारे भये कारे तेरे नैन रतनारे भये , \r मोती भये सीरे तू न सीरी अजहूँ भई । \r छवि कहै पति मै चकैया मिली तू न मिली , \r ठौया तरु छूटी तेरी टेक ना छुटी दई । \r अरुनई नई तेरी अरुनई नई भई , \r चहचही बोली आली तू न बोली ऎबई । \r मँद छबि भए चँद फूले अरविँद बृँद , \r गई री विभावरी न रिस रावरी गई ।   \r \r छवि 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द्वितीय पुत्र गो. श्री विट्ठलनाथ जी (ज.सं.- 1535 वि.) के शिष्य थे। जन्म अनुमानत: सं.- 1572 वि. के आसपास \"मथुरा\" यत्र सन्निहिओ हरि: (श्रीमद्भागवत : 10.1.28) में माथुर चतुर्वेदी ब्राह्मण के एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनके माता पिता का नाम बहुत खेज करने के बाद आज तक नहीं जाना जा सका है। \"स्वामी\" पदवी उनको गो. विट्ठलनाथ जी ने दी, जो आज तक आपके वंशजों के साथ जुड़ती हुई चली आ रही है।\r\n\r\nछीतस्वामी का इतवृत्त भक्तमाल जैसे भक्त-गुण-गायक ग्रंथों में नहीं मिलता। श्री गोकुलनाथकृत वार्ता, उसकी \"हरिराय जी (सं.- 1647 वि.) कृत टीका- \"भावप्रकाश\", प्राणनाथ कवि (समय-अज्ञात) कृत \"संप्रदाय कल्पद्रुम\", एवं श्रीनाथभट्ट (समय-अज्ञात) कृत संस्कृत वार्ता-मणि-माला, आदि ग्रंथों में ही मिलता है।\r\n\r\nछीतस्वामी एक अच्छे सुकवि, निपुण संगीतज्ञ तथा गुणग्राही व्यक्ति थे। \"संप्रदायकल्पद्रुम\" के अनुसार यह समय (सं. 1592 वि.) मथुरापुरी से नातिदूर नए बसे \"गोकुल\" ग्राम में गोस्वामी श्री विठ्ठलनाथ के समृद्ध रूप में विराजने का तथा स्वपुष्टिसंप्रदाय के नाना लोकरंजक रूपों और सुंदर सिद्धांतों को सजाने सँवारने का था। श्री गोस्वामी जी के प्रति अनेक अतिरंजक बातें मथुरा में सुनकर और उनकी परीक्षा लेने जैसी मनोवृत्ति बनाकर एक दिन छीतस्वामी अपने दो-चार साथियों को लेकर, जिन्हें \"वार्ता\" में गुंडा कहा गया है, गोकुल पहुँचे ओर साथियों को बाहर ही बैठाकर अकेले खोटा रुपया तथा थोथा नारियल ले वहाँ गए जहाँ गोस्वामी विट्ठलनाथ जी अपने ज्येष्ठ पुत्र गिरिधर जी (जं.सं. 1597 वि.) के साथ स्वसंप्रदाय संबंधीं अंतरग बातें कर रहे थे। छीतू गोस्वामी जी गिरिधर जी का दर्शनीय भव्य स्वरूप देखकर स्तब्ध रह गए और मन में सोचने लगे, \"बड़ी भूल की जो आपकी परीक्षा लेने के बहाने मसखरी करने यहाँ आया। अरे, ये साक्षात् पूर्ण पुरुषोत्तम हैं - \"जेई तेई, तेई, एई कछु न संदेह\" (छीतस्वामी कृत एक पद का अंश), अत: मुझे धिक्कार है। अरे इन्हीं से तू कुटिलता करने आया? छीतू चौबे इस प्रकार मन ही मन पछतावा कर रही रहे थे कि एकाएक गोस्वामी जी ने इन्हें बाहर दरवाजे के पास खड़ा देखकर बिना किसी पूर्व जान पहचान के कहा \"अरे, छीतस्वामी जी बाहर क्यों खड़े हो, भीतर आओ, बहुत दिनन में दीखे।\" छीतू चौबे, इस प्रकार अपना मानसहित नाम सुनकर और भी द्रवित हुए तथा तत्क्षण भीतर जाकर दोनों हाथ जोड़कर तथा साष्टांग प्रणाम कर अर्ज की, \"\"जैराज, मोई सरन में लेउ, मैं मन में भौत कुटिलता लैके यहाँ आयो हो सो सब आपके दरसनन ते भाजि गई। अब मैं आपके हाथ बिकानों हां जो चाँहों से करौ।\"\" गास्वामी जी ने \"छीतू\" जी के मुख से ये निष्कपट भावभरे बचन सुने और अपने प्रति उनका यह प्रेमभाव देख उनसे कहा - \"\"अच्छौ, अच्छौ, आगे (भीतर) आऔ-।\"\" तथा उठाकर उन्हें गले लगाया, पास में बड़े प्रेम से उन्हें बैठाया। तत्पश्चात् अपने पूजित भगवद्विग्रह के पास ले जाकर उन्हें नाममंत्र सुनायौ। नाममंत्र सुनते ही \"छीतू\" जी ने तत्क्षण एक \"पद\" की रचना कर बड़े गद्गद् स्वरों में गाया, जो इस प्रकार है :\r\n\r\n<br>","raw_bio":"छीतस्वामी वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) के आठ कवियों (अष्टछाप कवि) में एक। जिन्होने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का अपने पदों में वर्णन किया। इनका जन्म १५१५ ई० में हुआ था। मथुरा के चतुर्वेदी ब्राह्मण थे। घर में जजमानी और पंडागिरी होती थी। प्रसिद्ध है कि ये बीरबल के पुरोहित थे। पंडा होने के कारण पहले ये बड़े अक्खड़ और उद्दण्ड थे।\r  \r छीतस्वामी श्री गोकुलनाथ 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गोस्वामी जी ने इन्हें बाहर दरवाजे के पास खड़ा देखकर बिना किसी पूर्व जान पहचान के कहा \"अरे, छीतस्वामी जी बाहर क्यों खड़े हो, भीतर आओ, बहुत दिनन में दीखे।\" छीतू चौबे, इस प्रकार अपना मानसहित नाम सुनकर और भी द्रवित हुए तथा तत्क्षण भीतर जाकर दोनों हाथ जोड़कर तथा साष्टांग प्रणाम कर अर्ज की, \"\"जैराज, मोई सरन में लेउ, मैं मन में भौत कुटिलता लैके यहाँ आयो हो सो सब आपके दरसनन ते भाजि गई। अब मैं आपके हाथ बिकानों हां जो चाँहों से करौ।\"\" गास्वामी जी ने \"छीतू\" जी के मुख से ये निष्कपट भावभरे बचन सुने और अपने प्रति उनका यह प्रेमभाव देख उनसे कहा - \"\"अच्छौ, अच्छौ, आगे (भीतर) आऔ-।\"\" तथा उठाकर उन्हें गले लगाया, पास में बड़े प्रेम से उन्हें बैठाया। तत्पश्चात् अपने पूजित भगवद्विग्रह के पास ले जाकर उन्हें नाममंत्र सुनायौ। नाममंत्र सुनते ही \"छीतू\" जी ने तत्क्षण एक \"पद\" की रचना कर बड़े गद्गद् स्वरों में गाया, जो इस प्रकार है :\r \r ","slug":"chitasvami","DOB":null,"DateOfDemise":null,"location":"nan","url":"/sootradhar/chitasvami","tags":"","created":"2023-09-22T13:50:35.409755","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":4},{"id":10777,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/Jaishankar_Prasad.jpg","name":"जयशंकर प्रसाद","bio":"Jaishankar Prasad was a famed figure in modern Hindi literature as well as Hindi theatre. Prasad was his pen name.","raw_bio":"Jaishankar Prasad was a famed figure in modern Hindi literature as well as Hindi theatre. Prasad was his pen name.","slug":"jayasankara-prasada","DOB":"1889-09-30","DateOfDemise":"1937-09-14","location":"वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत","url":"/sootradhar/jayasankara-prasada","tags":"जयशंकर प्रसाद, Jaishankar Prasad, Rekhta, Kavitakosh, Hindwi","created":"2023-09-22T13:55:11.682383","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":4},{"id":10813,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/janakivallabha-sastri.jpeg","name":"जानकीवल्लभ शास्त्री","bio":"Acharya Janki Ballabh Shastri was an Indian Hindi poet, writer and critic. He declined to accept Padma Shri in 2010 stating his disciples deserved much more than Shri. He also refused the Padmashri in 1994. <br>\r\nआचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री (५ फरवरी १९१६ - ०७ अप्रैल, २०११) हिंदी व संस्कृत के कवि, लेखक एवं आलोचक थे। उन्होने २०१० में पद्मश्री सम्मान लेने से मना कर दिया था। इसके पूर्व १९९४ में भी उन्होने पद्मश्री नहीं स्वीकारी थी।\r\n\r\nवे छायावादोत्तर काल के सुविख्यात कवि थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें भारत भारती पुरस्कार से सम्मानित किया था। आचार्य का काव्य-संसार बहुत ही विविध और व्यापक है।वे थोड़े-से कवियों में रहे हैं, जिन्हें हिंदी कविता के पाठकों से बहुत मान-सम्मान मिला है। प्रारंभ में उन्होंने संस्कृत में कविताएँ लिखीं। फिर महाकवि निराला की प्रेरणा से हिंदी में आए।","raw_bio":"Acharya Janki Ballabh Shastri was an Indian Hindi poet, writer and critic. He declined to accept Padma Shri in 2010 stating his disciples deserved much more than Shri. 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He is affiliated with the Rashtriya Janata Dal. He currently resides in his private residence in Patna. <br>\r\nजाबिर हुसैन का जन्म सन् १९४५ में गाँव नौनहीं राजगिर, जिला नालंदा, बिहार में हुआ। वह अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य के प्राध्यापक रहे। सक्रिय राजनीति में भाग लेते हुए १९७७ में मुंगेर से बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए और मंत्री बने। वर्ष १९९५ से बिहार विधान परिषद के सभापति थे। जाबिर हुसैन हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी (तीनों भाषाओं में समान अधिकार के साथ लेखन करते रहे हैं। उनकी हिंदी रचनाओं में- डोला बीबी का मजार, अतीत का चेहरा, लोगां, एक नदी रेत भरी प्रमुख हैं। अपने लंबे राजनैतिक-सामाजिक जीवन के अनुभवों में उपस्थित आम आदमी के संघर्षों को उन्होंने अपने साहित्य में प्रकट किया है। संघर्षरत आम आदमी और विशिष्ट व्यक्तित्वों पर लिखी गई उनकी डायरियाँ चर्चित-प्रशंसित हुई हैं। जाबिर हुसैन ने डायरी विधा में एक अभिनव प्रयोग किया है जो अपनी प्रस्तुति, शैली और शिल्प में नवीन है।","raw_bio":"Jabir Husain, is an Indian politician and the former Member of the Parliament representing Bihar in the Rajya Sabha. He is affiliated with the Rashtriya Janata Dal. He currently resides in his private residence in Patna.  \r जाबिर हुसैन का जन्म सन् १९४५ में गाँव नौनहीं राजगिर, जिला नालंदा, बिहार में हुआ। वह अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य के प्राध्यापक रहे। सक्रिय राजनीति में भाग लेते हुए १९७७ में मुंगेर से बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए और मंत्री बने। वर्ष १९९५ से बिहार विधान परिषद के सभापति थे। जाबिर हुसैन हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी (तीनों भाषाओं में समान अधिकार के साथ लेखन करते रहे हैं। उनकी हिंदी रचनाओं में- डोला बीबी का मजार, अतीत का चेहरा, लोगां, एक नदी रेत भरी प्रमुख हैं। अपने लंबे राजनैतिक-सामाजिक जीवन के अनुभवों में उपस्थित आम आदमी के संघर्षों को उन्होंने अपने साहित्य में प्रकट किया है। संघर्षरत आम आदमी और विशिष्ट व्यक्तित्वों पर लिखी गई उनकी डायरियाँ चर्चित-प्रशंसित हुई हैं। जाबिर हुसैन ने डायरी विधा में एक अभिनव प्रयोग किया है जो अपनी प्रस्तुति, शैली और शिल्प में नवीन है।","slug":"jabira-husena","DOB":"1945-09-05","DateOfDemise":null,"location":"India","url":"/sootradhar/jabira-husena","tags":"","created":"2023-09-22T13:56:54.456716","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":4},{"id":10817,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/javeda-anavara.jpeg","name":"जावेद अनवर","bio":"सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे <br>\r\n\r\nमोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा \r\n<br><br>\r\n- जावेद अनवर\r\n\r\n<hr>\r\nBooks: शहर में शाम, अश्कों की धनक (आँसुओं का इन्द्रधनुष) और भेड़िए सोए नहीं।","raw_bio":"सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे  \r \r मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा \r  \r - जावेद अनवर\r \r  \r Books: शहर में शाम, अश्कों की धनक (आँसुओं का इन्द्रधनुष) और भेड़िए सोए नहीं।","slug":"javeda-anavara","DOB":null,"DateOfDemise":"2011-11-25","location":"Canada","url":"/sootradhar/javeda-anavara","tags":"","created":"2023-09-22T13:57:23.823071","is_has_special_post":true,"is_special_author":false,"language":4},{"id":10818,"image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/javed-nasir.jpeg","name":"जावेद नासिर","bio":"Poet (1949-2006)","raw_bio":"Poet (1949-2006)","slug":"javeda-nasira","DOB":"1949-01-01","DateOfDemise":"2006-01-01","location":"nan","url":"/sootradhar/javeda-nasira","tags":"","created":"2023-09-22T12:18:46.874824","is_has_special_post":false,"is_special_author":false,"language":4}],"description":"<p style=\"text-align: center; font-size: 24px;\"> The Great Poets and Writers in Indian and World History! </p>","image":"https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_description/black.jpg"}