HTTP 200 OK
Allow: GET, HEAD, OPTIONS
Content-Type: application/json
Vary: Accept
{
"count": 17752,
"next": "http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=api&page=652",
"previous": "http://admin.kavishala.in/sootradhar/authors/?format=api&page=650",
"results": [
{
"id": 27900,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%9A%E0%A4%A6%E0%A4%A8_%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A4%B5.png",
"name": "चंदन यादव",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-लेखक।</p> ",
"raw_bio": "नई पीढ़ी के कवि-लेखक। ",
"slug": "candana-yadava",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "नई दिल्ली, दिल्ली",
"url": "/sootradhar/candana-yadava",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:11.168388",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27901,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%9A%E0%A4%A1%E0%A4%A6%E0%A4%A4%E0%A4%A4_%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A4%B2.png",
"name": "चंडीदत्त शुक्ल",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित कवि-लेखक और पत्रकार।</p> ",
"raw_bio": "सुपरिचित कवि-लेखक और पत्रकार। ",
"slug": "candidatta-sukla",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "गोंडा, उत्तर प्रदेश",
"url": "/sootradhar/candidatta-sukla",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:11.908511",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27902,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%9A%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%A6.png",
"name": "चंद्रबिंद",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित कवि-लेखक। 'फल्गु किनारे' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित।</p> ",
"raw_bio": "सुपरिचित कवि-लेखक। 'फल्गु किनारे' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित। ",
"slug": "candrabinda",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "भोजपुर, बिहार",
"url": "/sootradhar/candrabinda",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:12.348764",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27903,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kavishala_logo.png",
"name": "चन्द्रधर शर्मा",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">संस्कृत-हिंदी-अँग्रेज़ी के रचनाकार। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग से संबद्ध रहे।</p> ",
"raw_bio": "संस्कृत-हिंदी-अँग्रेज़ी के रचनाकार। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग से संबद्ध रहे। ",
"slug": "candradhara-sarma",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "",
"url": "/sootradhar/candradhara-sarma",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:12.758239",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27904,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kavishala_logo.png",
"name": "चन्द्रगुप्त विद्यालंकार",
"bio": " ",
"raw_bio": null,
"slug": "candragupta-vidyalankara",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "",
"url": "/sootradhar/candragupta-vidyalankara",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:13.378876",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27905,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%9A%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%A4_%E0%A4%A6%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%B2.png",
"name": "चंद्रकांत देवताले",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सातवें दशक के समादृत कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> चंद्रकांत देवताले</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 07/11/1936</bdi> | बैतूल, मध्य प्रदेश</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 14/08/2017</bdi> | इंदौर, मध्य प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p>समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि चंद्रकांत देवताले का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7 नवंबर 1936 को जौलखेड़ा, बैतूल, मध्य प्रदेश में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा इंदौर में हुई। उन्होंने अपना शोध-पत्र मुक्तिबोध पर लिखा था। <br/><br/>छठे-सातवें दशक में उनकी कविताएँ उस दौर की लघु पत्रिकाओं में छपने लगी थीं और उनके नए लहज़े, मद्धम रोष और प्रतिरोध को सुना जाने लगा था। उनका पहला कविता-संग्रह ‘हडि्डयों में छिपा ज्वर’ 1973 में बहुचर्चित 'पहचान’ सीरीज़ के अंतर्गत प्रकाशित हुआ। उनकी कविताओं में समसामयिकता का यथार्थ चित्रण पाया जाता है जहाँ उन्होंने आमज के अपने विडंबनात्मक जीवन तथा उसमें अपनी और किसी प्रकार संघर्ष कर रहे असंख्य लोगों की तनावपूर्ण जिजीविषा का कवि’’ कहा है और मानव जीवन के साथ उनकी कविता के रिश्ते को सुख-दुख के संगाती का, जागरूकता तथा ऐंद्रियता का रिश्ता कहा है। <br/><br/>उनकी कविताओं में स्त्रियाँ अपनी घरेलू, आत्मीय और वर्गीय उपस्थिति में उतरती रही हैं। इस संबंध में एक दावा रहा है कि हिंदी में स्त्रियों पर सबसे अधिक और सबसे अच्छी कविताएँ चंद्रकांत देवताले के ही पास हैं। समादृत कवि वीरेन डंगवाल ने अपनी कविताओं में आम आदमी के संघर्षों, अभावों, प्रतिरोधों को अभिव्यक्ति दी है। उनकी कविताओं में बार-बार उभरते और लौटते रहते घरेलू अपनेपन के इमेजेज़ के लिए उन्हें घर, परिवार और पड़ोस का कवि भी कहा गया है। विष्णु खरे ने उन्हें ‘‘व्यापक और प्रतिबद्ध अर्थों में इस देश के इस कठिन समय में अपनी निजी, पारिवारिक और सामाजिक ज़िंदगी, भारतीय समाविताओं की स्त्रियों को इन आत्मीय शब्दों में दर्ज किया है—‘‘और देवताले की स्त्रियाँ! शोक और आह्लाद और उनके विलक्षण झुटपुटे का वह महोत्सव, जिसका एक छोर एक विराट अमूर्तन में है- पछीटे जाते कपड़ों, अँधेरी गुफा में गुँधे आटे से सूरज की पीठ पर पकती असंख्य रोटियों आदि-आदि में, गोया यह सब करती स्त्री स्वयं कर्मठ मानवता है। और दूसरा छोर है घर में अकेली उस युवती के निविड़ एकांत में जहाँ उसका अकेलापन ही उसका उल्लास, उसका भोग उसकी यातना, उसके भी आगे उसका स्वातंत्र्य है।’’<br/><br/>‘हड्डियों में छिपा ज्वर’ (1973), ‘दीवारों पर ख़ून से’ (1975), ‘लकड़बग्घा हँस रहा है’ (1980), ‘रोशनी के मैदान की तरफ़’ (1982), ‘भूखंड तप रहा है’ (1982), ‘आग हर चीज़ में बताई गई थी’ (1987), ‘बदला बेहद महँगा सौदा’ (1995), ‘पत्थर की बैंच’ (1996), ‘उसके सपने’ (1997), ‘इतनी पत्थर रोशनी’ (2002), ‘उजाड़ में संग्रहालय’ (2003), ‘जहाँ थोड़ा सा सूर्योदय होगा’ (2008), ‘पत्थर फेंक रहा हूँ’ (2011) उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। ‘मुक्तिबोध: कविता और जीवन विवेक’ उनकी आलोचना की किताब है। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘दूसरे-दूसरे आकाश’ और ‘डबरे पर सूरज का बिंब’ का संपादन किया है। ‘पिसाटी का बुर्ज’ में उन्होंने दिलीप चित्रे की कविताओं का मराठी से हिंदी अनुवाद किया है।<br/><br/>चंद्रकांत देवताले को उनके कविता-संग्रह ‘पत्थर फेंक रहा हूँ’ के लिए वर्ष 2012 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।<br/",
"raw_bio": "सातवें दशक के समादृत कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : चंद्रकांत देवताले जन्म : 07/11/1936 | बैतूल, मध्य प्रदेश निधन : 14/08/2017 | इंदौर, मध्य प्रदेश समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि चंद्रकांत देवताले का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7 नवंबर 1936 को जौलखेड़ा, बैतूल, मध्य प्रदेश में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा इंदौर में हुई। उन्होंने अपना शोध-पत्र मुक्तिबोध पर लिखा था। छठे-सातवें दशक में उनकी कविताएँ उस दौर की लघु पत्रिकाओं में छपने लगी थीं और उनके नए लहज़े, मद्धम रोष और प्रतिरोध को सुना जाने लगा था। उनका पहला कविता-संग्रह ‘हडि्डयों में छिपा ज्वर’ 1973 में बहुचर्चित 'पहचान’ सीरीज़ के अंतर्गत प्रकाशित हुआ। उनकी कविताओं में समसामयिकता का यथार्थ चित्रण पाया जाता है जहाँ उन्होंने आमज के अपने विडंबनात्मक जीवन तथा उसमें अपनी और किसी प्रकार संघर्ष कर रहे असंख्य लोगों की तनावपूर्ण जिजीविषा का कवि’’ कहा है और मानव जीवन के साथ उनकी कविता के रिश्ते को सुख-दुख के संगाती का, जागरूकता तथा ऐंद्रियता का रिश्ता कहा है। उनकी कविताओं में स्त्रियाँ अपनी घरेलू, आत्मीय और वर्गीय उपस्थिति में उतरती रही हैं। इस संबंध में एक दावा रहा है कि हिंदी में स्त्रियों पर सबसे अधिक और सबसे अच्छी कविताएँ चंद्रकांत देवताले के ही पास हैं। समादृत कवि वीरेन डंगवाल ने अपनी कविताओं में आम आदमी के संघर्षों, अभावों, प्रतिरोधों को अभिव्यक्ति दी है। उनकी कविताओं में बार-बार उभरते और लौटते रहते घरेलू अपनेपन के इमेजेज़ के लिए उन्हें घर, परिवार और पड़ोस का कवि भी कहा गया है। विष्णु खरे ने उन्हें ‘‘व्यापक और प्रतिबद्ध अर्थों में इस देश के इस कठिन समय में अपनी निजी, पारिवारिक और सामाजिक ज़िंदगी, भारतीय समाविताओं की स्त्रियों को इन आत्मीय शब्दों में दर्ज किया है—‘‘और देवताले की स्त्रियाँ! शोक और आह्लाद और उनके विलक्षण झुटपुटे का वह महोत्सव, जिसका एक छोर एक विराट अमूर्तन में है- पछीटे जाते कपड़ों, अँधेरी गुफा में गुँधे आटे से सूरज की पीठ पर पकती असंख्य रोटियों आदि-आदि में, गोया यह सब करती स्त्री स्वयं कर्मठ मानवता है। और दूसरा छोर है घर में अकेली उस युवती के निविड़ एकांत में जहाँ उसका अकेलापन ही उसका उल्लास, उसका भोग उसकी यातना, उसके भी आगे उसका स्वातंत्र्य है।’’ ‘हड्डियों में छिपा ज्वर’ (1973), ‘दीवारों पर ख़ून से’ (1975), ‘लकड़बग्घा हँस रहा है’ (1980), ‘रोशनी के मैदान की तरफ़’ (1982), ‘भूखंड तप रहा है’ (1982), ‘आग हर चीज़ में बताई गई थी’ (1987), ‘बदला बेहद महँगा सौदा’ (1995), ‘पत्थर की बैंच’ (1996), ‘उसके सपने’ (1997), ‘इतनी पत्थर रोशनी’ (2002), ‘उजाड़ में संग्रहालय’ (2003), ‘जहाँ थोड़ा सा सूर्योदय होगा’ (2008), ‘पत्थर फेंक रहा हूँ’ (2011) उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। ‘मुक्तिबोध: कविता और जीवन विवेक’ उनकी आलोचना की किताब है। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘दूसरे-दूसरे आकाश’ और ‘डबरे पर सूरज का बिंब’ का संपादन किया है। ‘पिसाटी का बुर्ज’ में उन्होंने दिलीप चित्रे की कविताओं का मराठी से हिंदी अनुवाद किया है। चंद्रकांत देवताले को उनके कविता-संग्रह ‘पत्थर फेंक रहा हूँ’ के लिए वर्ष 2012 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।",
"slug": "candrakanta-devatale",
"DOB": "1936-11-07",
"DateOfDemise": "2017-08-14",
"location": "बैतूल, मध्य प्रदेश",
"url": "/sootradhar/candrakanta-devatale",
"tags": "प्रगतिशील कविता,नई कविता",
"created": "2024-01-15T15:11:48.011342",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27906,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kavishala_logo.png",
"name": "चंद्रकांत पाटील",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित अनुवादक, कवि और समीक्षक। अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से\r\r\nसम्मानित।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> चंद्रकांत नागेशराव पाटील</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 03/09/1944</bdi></span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": "सुपरिचित अनुवादक, कवि और समीक्षक। अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से\r\r सम्मानित। मूल नाम : चंद्रकांत नागेशराव पाटील जन्म : 03/09/1944 ",
"slug": "candrakanta-patila",
"DOB": "1944-09-03",
"DateOfDemise": null,
"location": "",
"url": "/sootradhar/candrakanta-patila",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:14.310094",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27908,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kavishala_logo.png",
"name": "चंद्रकिरण सौनरेक्सा",
"bio": " ",
"raw_bio": null,
"slug": "candrakirana-saunareksa",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "पेशावर, ख़ैबर पुख़्तुंख़ुवा",
"url": "/sootradhar/candrakirana-saunareksa",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:15.113600",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27909,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%9A%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B0.png",
"name": "चंद्रकुमार",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित कवि। 'स्मृतियों में बसा समय' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित।</p> ",
"raw_bio": "सुपरिचित कवि। 'स्मृतियों में बसा समय' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित। ",
"slug": "candrakumara",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "जयपुर, राजस्थान",
"url": "/sootradhar/candrakumara",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:15.702493",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27910,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kavishala_logo.png",
"name": "चंद्रकुँवर बर्त्वाल",
"bio": " <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> चंद्रकुँवर बर्त्वाल</span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": " मूल नाम : चंद्रकुँवर बर्त्वाल ",
"slug": "candrakumvara-bartvala",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "",
"url": "/sootradhar/candrakumvara-bartvala",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:16.208375",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27911,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/%E0%A4%9A%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%96%E0%A4%B0.png",
"name": "चंद्रशेखर",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">अत्यंत सक्रिय छात्र नेता और अध्येता। जेएनयू से पढ़ाई। 1997 को बिहार बंद के समर्थन में सिवान शहर के जे.पी. चौराहे पर सभा करते हुए अपराधियों की गोली से शहीद हुए। चंदू के नाम से लोकप्रिय <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 20/09/1965</bdi> | सिवान, बिहार</span></p>\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 31/03/1997</bdi> | सिवान, बिहार</span></p>\r\n</div> <br> <p>सैनिक स्कूल तिलैया, पटना विश्वविद्यालय और फिर जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय से एम.फिल. तक शिक्षा। बिहार में ही ए.आई.एम.एफ़. के बैनर तले सक्रिय छात्र राजनीति की शुरुआत। जे.एन.यू. आकर आइसा में सक्रिय हुए और जे.एन.यू. छात्रसंघ में लगातार तीन बार चुने गए। 1993-94 में उपाध्यक्ष और फिर 95-96 व 96-97 में छात्रसंघ अध्यक्ष। किसानों, मज़दूरों के बीच ज़मीनी काम-काज में सीधी हिस्सेदारी निभाने विश्वविद्यालय छोड़कर भाकपा (माले) के पूरावक़्ती कार्यकर्त्ता के बतौर अपने ज़िल सिवान लौटे। 31 मार्च 1997 को बिहार बंद के समर्थन में सिवान शहर के जे.पी. चौराहे पर सभा करते हुए अपराधियों की गोली से अपने साथी श्याम नारायण यादव और एक श्रोता बुटेली मियाँ के साथ शहीद हुए। ज़िंदगी ने लिखने का वक़्त बहुत कम दिया। कुछ कविताएँ, कहानियाँ, लघु कथाएँ, विभिन्न विषयों पर टिप्पणियाँ समकालीन प्रकाशन से उन पर आई किताब ‘हमारी पीढ़ी का नायक’ में प्रकाशित। चंदू के नाम से लोकप्रिय",
"raw_bio": "अत्यंत सक्रिय छात्र नेता और अध्येता। जेएनयू से पढ़ाई। 1997 को बिहार बंद के समर्थन में सिवान शहर के जे.पी. चौराहे पर सभा करते हुए अपराधियों की गोली से शहीद हुए। चंदू के नाम से लोकप्रिय जन्म : 20/09/1965 | सिवान, बिहार निधन : 31/03/1997 | सिवान, बिहार सैनिक स्कूल तिलैया, पटना विश्वविद्यालय और फिर जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय से एम.फिल. तक शिक्षा। बिहार में ही ए.आई.एम.एफ़. के बैनर तले सक्रिय छात्र राजनीति की शुरुआत। जे.एन.यू. आकर आइसा में सक्रिय हुए और जे.एन.यू. छात्रसंघ में लगातार तीन बार चुने गए। 1993-94 में उपाध्यक्ष और फिर 95-96 व 96-97 में छात्रसंघ अध्यक्ष। किसानों, मज़दूरों के बीच ज़मीनी काम-काज में सीधी हिस्सेदारी निभाने विश्वविद्यालय छोड़कर भाकपा (माले) के पूरावक़्ती कार्यकर्त्ता के बतौर अपने ज़िल सिवान लौटे। 31 मार्च 1997 को बिहार बंद के समर्थन में सिवान शहर के जे.पी. चौराहे पर सभा करते हुए अपराधियों की गोली से अपने साथी श्याम नारायण यादव और एक श्रोता बुटेली मियाँ के साथ शहीद हुए। ज़िंदगी ने लिखने का वक़्त बहुत कम दिया। कुछ कविताएँ, कहानियाँ, लघु कथाएँ, विभिन्न विषयों पर टिप्पणियाँ समकालीन प्रकाशन से उन पर आई किताब ‘हमारी पीढ़ी का नायक’ में प्रकाशित। चंदू के नाम से लोकप्रिय",
"slug": "candrasekhara",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "सिवान, बिहार",
"url": "/sootradhar/candrasekhara",
"tags": "प्रगतिशील कविता,नई कविता",
"created": "2024-01-11T16:39:16.806398",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
},
{
"id": 27912,
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_author/kavishala_logo.png",
"name": "चंद्रशेखर वाजपेयी",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">रीतिकालीन कवि। शृंगार और वीर रस की कविताओं में निष्णात। 'हम्मीर हठ' कीर्ति का आधार ग्रंथ।</p> ",
"raw_bio": "रीतिकालीन कवि। शृंगार और वीर रस की कविताओं में निष्णात। 'हम्मीर हठ' कीर्ति का आधार ग्रंथ। ",
"slug": "candrasekhara-vajapeyi",
"DOB": null,
"DateOfDemise": null,
"location": "फ़तेहपुर, उत्तर प्रदेश",
"url": "/sootradhar/candrasekhara-vajapeyi",
"tags": "",
"created": "2024-01-11T16:39:17.217377",
"is_has_special_post": false,
"is_special_author": false,
"language": 4
}
],
"description": "<p style=\"text-align: center; font-size: 24px;\"> The Great Poets and Writers in Indian and World History! </p>",
"image": "https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/sootradhar_description/black.jpg"
}