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"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> उज्ज्वल शुक्ल</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span>इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p",
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"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">‘संचारिणी’, ‘गांडीय वैष्णवीय रसेर अलकीकोत्व’ आदि संग्रहों के लिए ज्ञात बांग्ला कवयित्री।</p> ",
"raw_bio": "‘संचारिणी’, ‘गांडीय वैष्णवीय रसेर अलकीकोत्व’ आदि संग्रहों के लिए ज्ञात बांग्ला कवयित्री। ",
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"name": "उमा शंकर चौधरी",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-कथाकार। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन और साहित्य अकादेमी के युवा पुरस्कार से सम्मानित।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 01/03/1978</bdi> | खगड़िया, बिहार</span\r\n</div> <br> <p>उमा शंकर चौधरी का जन्म 1 मार्च 1978 को खगड़िया, बिहार में हुआ। वह इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-कथाकार हैं। <br/><br/>उनके तीन कविता-संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’, ‘वे तुमसे पूछेंगे डर का रंग’ और ‘चूँकि सवाल कभी ख़त्म नहीं होते’ शीर्षक से प्रकाशित हैं। उनकी कहानियों का संकलन ‘अयोध्या बाबू सनक गए हैं’, ‘कट टु दिल्ली और अन्य कहानियाँ’ और ‘दिल्ली में नींद’ में हुआ है। उनका एक उपन्यास ‘अँधेरा कोना’ भी प्रकाशित है। ‘हाशिए की वैचारिकी’ और ‘हिस्सेदारी के प्रश्न-प्रतिप्रश्न’ उनके द्वारा संपादित आलोचनात्मक-कृतियाँ हैं। <br/><br/>वह साहित्य अकादेमी युवा सम्मान, भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन सम्मान, रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार, अंकुर मिश्र स्मृति कविता पुरस्कार आदि से सम्मानित किए गए हैं। उनका कविता-संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’ मराठी अनुवाद में प्रकाशित हुआ है। कुछ कविताएँ भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के स्नातक-स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का हिस्सा हैं। कहानियों और कविताओं पर शोध हुए हैं। <br/",
"raw_bio": "इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-कथाकार। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन और साहित्य अकादेमी के युवा पुरस्कार से सम्मानित। जन्म : 01/03/1978 | खगड़िया, बिहार उमा शंकर चौधरी का जन्म 1 मार्च 1978 को खगड़िया, बिहार में हुआ। वह इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-कथाकार हैं। उनके तीन कविता-संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’, ‘वे तुमसे पूछेंगे डर का रंग’ और ‘चूँकि सवाल कभी ख़त्म नहीं होते’ शीर्षक से प्रकाशित हैं। उनकी कहानियों का संकलन ‘अयोध्या बाबू सनक गए हैं’, ‘कट टु दिल्ली और अन्य कहानियाँ’ और ‘दिल्ली में नींद’ में हुआ है। उनका एक उपन्यास ‘अँधेरा कोना’ भी प्रकाशित है। ‘हाशिए की वैचारिकी’ और ‘हिस्सेदारी के प्रश्न-प्रतिप्रश्न’ उनके द्वारा संपादित आलोचनात्मक-कृतियाँ हैं। वह साहित्य अकादेमी युवा सम्मान, भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन सम्मान, रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार, अंकुर मिश्र स्मृति कविता पुरस्कार आदि से सम्मानित किए गए हैं। उनका कविता-संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’ मराठी अनुवाद में प्रकाशित हुआ है। कुछ कविताएँ भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के स्नातक-स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का हिस्सा हैं। कहानियों और कविताओं पर शोध हुए हैं। ",
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"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-लेखक।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> उपांशु</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span>पटना, बिहार</span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": "नई पीढ़ी के कवि-लेखक। मूल नाम : उपांशु जन्म : पटना, बिहार ",
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"name": "उपेन्द्रनाथ अश्क",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">शुक्लोत्तर युग के प्रमुख कथाकार, एकांकीकार और उपन्यासकार। निम्न-मध्यमवर्गीय यथार्थ चित्रण के लिए उल्लेखनीय।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">उपनाम :</span><span> 'Ashk'</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 01/12/1910</bdi></span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 01/01/1996</bdi></span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": "शुक्लोत्तर युग के प्रमुख कथाकार, एकांकीकार और उपन्यासकार। निम्न-मध्यमवर्गीय यथार्थ चित्रण के लिए उल्लेखनीय। उपनाम : 'Ashk' जन्म : 01/12/1910 निधन : 01/01/1996 ",
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"name": "उषादेवी मित्र",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">हिंदी कथा-साहित्य के आरंभिक दौर की महत्वपूर्ण लेखिका। स्त्री-विमर्श-कथाकार।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n</div> <br> <p>उषादेवी मित्रा का जन्म सन् 1897 में जबलपुर में हुआ था। आप द्विवेदीयुगीन कहानी की चर्चित लेखिका रही हैं। बंगला भाषा-भाषी होते हुए भी आपने हिंदी-लेखन को अपना साहित्य-कर्म का क्षेत्र चुना। <br/>‘वचन का मोल’, ‘प्रिया', ‘नष्ट नीड़', ‘जीवन की मुस्कान\", और 'सोहनी' नामक उपन्यासों के अतिरिक्त 'आँधी के छंद', 'महावर’, 'नीम चमेली’, 'मेघ मल्लार’, ‘रागिनी’, 'सांध्य पूर्वी' और ‘रात की रानी' आदि आपके उल्लेखनीय कहानी-संघरह हैं।<br/>'सांध्य पूर्वी' पर अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन का 'सेकसरिया पुरस्कार' भी आपको प्रदान किया गया। मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के जबलपुर अधिवेशन में आपकी साहित्य-सेवाओं के लिए<br/>आपका अभिनंदन मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमन्त्री द्वारिकाप्रसाद मिश्र द्वारा किया गया। आप नागपुर रेडियो की परामर्शदात्री समिति की सदस्या होने के साथ-साथ नगर की अनेक सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़ी थीं।<br/>आपका निधन 70 वर्ष की आयु में 9 सितम्बर सन् 1966 को हुआ था। यह विडंबना की ही बात है कि मृत्यु से पूर्व अपनी सुपुत्री डॉँ० बुलबुल चौधरी से अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए आपने कहा था, “मेरी<br/>सारी पुस्तकें भरी चिता पर मेरे साथ जला दी जाए। मेरी शवयात्रा में शास्त्रीय संगीत निनादित हो।” जिस लेखिका ने 50 वर्ष वैधव्य में गुजारकर निरंतर साहित्य-सृजन करके हिंदी की सेवा की हो और जिसकी लेखन-कला की सराहना प्रेमचंद तक ने की हो वह अपनी चिता के साथ क्षपनी रचनाओं को जलाने की इच्छा व्यक्त करे, इसकी पृष्ठभूमि में अवश्य ही घनीभूत अवसाद और उपेक्षा ही उत्प्रेरक का काम की होगी। <br/><br/",
"raw_bio": "हिंदी कथा-साहित्य के आरंभिक दौर की महत्वपूर्ण लेखिका। स्त्री-विमर्श-कथाकार। उषादेवी मित्रा का जन्म सन् 1897 में जबलपुर में हुआ था। आप द्विवेदीयुगीन कहानी की चर्चित लेखिका रही हैं। बंगला भाषा-भाषी होते हुए भी आपने हिंदी-लेखन को अपना साहित्य-कर्म का क्षेत्र चुना। ‘वचन का मोल’, ‘प्रिया', ‘नष्ट नीड़', ‘जीवन की मुस्कान\", और 'सोहनी' नामक उपन्यासों के अतिरिक्त 'आँधी के छंद', 'महावर’, 'नीम चमेली’, 'मेघ मल्लार’, ‘रागिनी’, 'सांध्य पूर्वी' और ‘रात की रानी' आदि आपके उल्लेखनीय कहानी-संघरह हैं। 'सांध्य पूर्वी' पर अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन का 'सेकसरिया पुरस्कार' भी आपको प्रदान किया गया। मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के जबलपुर अधिवेशन में आपकी साहित्य-सेवाओं के लिए आपका अभिनंदन मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमन्त्री द्वारिकाप्रसाद मिश्र द्वारा किया गया। आप नागपुर रेडियो की परामर्शदात्री समिति की सदस्या होने के साथ-साथ नगर की अनेक सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़ी थीं। आपका निधन 70 वर्ष की आयु में 9 सितम्बर सन् 1966 को हुआ था। यह विडंबना की ही बात है कि मृत्यु से पूर्व अपनी सुपुत्री डॉँ० बुलबुल चौधरी से अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए आपने कहा था, “मेरी सारी पुस्तकें भरी चिता पर मेरे साथ जला दी जाए। मेरी शवयात्रा में शास्त्रीय संगीत निनादित हो।” जिस लेखिका ने 50 वर्ष वैधव्य में गुजारकर निरंतर साहित्य-सृजन करके हिंदी की सेवा की हो और जिसकी लेखन-कला की सराहना प्रेमचंद तक ने की हो वह अपनी चिता के साथ क्षपनी रचनाओं को जलाने की इच्छा व्यक्त करे, इसकी पृष्ठभूमि में अवश्य ही घनीभूत अवसाद और उपेक्षा ही उत्प्रेरक का काम की होगी। ",
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"name": "उषा प्रियंवदा",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई कहानी के दौर की चर्चित कहानीकार।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 24/12/1930</bdi> | कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p><p> </p><p>नई कहानी के दौर की चर्चित महिला कहानीकारों की त्रयी में एक। अन्य दो, मन्नू भंडारी और कृष्णा सोबती हैं।</p><p>उषा प्रियंवदा का जन्म 24 दिसंबर सन 1931 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की और बाद एमीन अँग्रेज़ी में ही पीएचडी हुईं। मिरांडा हाउस, दिल्ली और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन की। तत्पश्चात, फुलब्राइट स्कालरशिप पर पोस्टडॉक करने अमरीका के ब्लूमिंगटन, इंडियाना गईं। वहीं विस्कांसिन विश्वविद्यालय, मैडीसन के दक्षिण एशियाई विभाग में प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुईं और वहीं रहती हैं। </p><p>वापसी और ज़िंदगी और गुलाब के फूल उनकी अतिचर्चित कहानियाँ हैं तो पचपन खंभे, लाल दीवारें उनका बहुचर्चित उपन्यास है। <br/>उषा प्रियंवदा की रचनाओं में संयुक्त परिवार का विघटन दिखता है तो आधुनिक जीवन की ऊब और अकेलेपन की स्थिति को भी चिन्हित किया जाता है। </p><p>मुख कृतियाँ<br/>उषा जी के कथा साहित्य में शहरी परिवारों के बड़े ही अनुभूति प्रवण चित्र हैं, और आधुनिक जीवन की उदासी, अकेलेपन, ऊब आदि का अंकन करने में उन्होंने अत्यंत गहरे यथार्थबोध का परिचय दिया है। उनकी कुछ प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं-</p><p>कहानी संग्रह<br/>'ज़िंदगी और गुलाब के फूल'<br/>'एक कोई दूसरा'<br/>'मेरी प्रिय कहानियां'</p><p>उपन्यास<br/>'पचपन खंभे'<br/>'लाल दीवारें'<br/>'रुकोगी नहीं राधिका'<br/>'शेष यात्रा'<br/>'अंतर्वंशी'</p><p>सम्मान और पुरस्कार<br/>2007 में केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित।<br/</p>",
"raw_bio": "नई कहानी के दौर की चर्चित कहानीकार। जन्म : 24/12/1930 | कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश नई कहानी के दौर की चर्चित महिला कहानीकारों की त्रयी में एक। अन्य दो, मन्नू भंडारी और कृष्णा सोबती हैं। उषा प्रियंवदा का जन्म 24 दिसंबर सन 1931 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की और बाद एमीन अँग्रेज़ी में ही पीएचडी हुईं। मिरांडा हाउस, दिल्ली और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन की। तत्पश्चात, फुलब्राइट स्कालरशिप पर पोस्टडॉक करने अमरीका के ब्लूमिंगटन, इंडियाना गईं। वहीं विस्कांसिन विश्वविद्यालय, मैडीसन के दक्षिण एशियाई विभाग में प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुईं और वहीं रहती हैं। वापसी और ज़िंदगी और गुलाब के फूल उनकी अतिचर्चित कहानियाँ हैं तो पचपन खंभे, लाल दीवारें उनका बहुचर्चित उपन्यास है। उषा प्रियंवदा की रचनाओं में संयुक्त परिवार का विघटन दिखता है तो आधुनिक जीवन की ऊब और अकेलेपन की स्थिति को भी चिन्हित किया जाता है। मुख कृतियाँ उषा जी के कथा साहित्य में शहरी परिवारों के बड़े ही अनुभूति प्रवण चित्र हैं, और आधुनिक जीवन की उदासी, अकेलेपन, ऊब आदि का अंकन करने में उन्होंने अत्यंत गहरे यथार्थबोध का परिचय दिया है। उनकी कुछ प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं- कहानी संग्रह 'ज़िंदगी और गुलाब के फूल' 'एक कोई दूसरा' 'मेरी प्रिय कहानियां' उपन्यास 'पचपन खंभे' 'लाल दीवारें' 'रुकोगी नहीं राधिका' 'शेष यात्रा' 'अंतर्वंशी' सम्मान और पुरस्कार 2007 में केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित।",
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"name": "उसमान",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सूफ़ी संत। शाह निज़ामुद्दीन चिश्ती की शिष्य परंपरा में 'हाजी बाबा' के शिष्य। भाषा में अवधी के साथ अरबी-फ़ारसी की शब्दावली का प्रयोग।</p> ",
"raw_bio": "सूफ़ी संत। शाह निज़ामुद्दीन चिश्ती की शिष्य परंपरा में 'हाजी बाबा' के शिष्य। भाषा में अवधी के साथ अरबी-फ़ारसी की शब्दावली का प्रयोग। ",
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"location": "ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश",
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"name": "उस्मान ख़ान",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-आलोचक।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> उस्मान ख़ान</span></p>\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 12/07/1984</bdi> | मंदसौर, मध्य प्रदेश</span></p>\r\n</div> <br> <p>उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मालवा के लोक–साहित्य पर पी.एच.डी. किया है और फ़िलहाल रतलाम के एक कॉलेज में अध्यापन कर रहे हैं।",
"raw_bio": "नई पीढ़ी के कवि-आलोचक। मूल नाम : उस्मान ख़ान जन्म : 12/07/1984 | मंदसौर, मध्य प्रदेश उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मालवा के लोक–साहित्य पर पी.एच.डी. किया है और फ़िलहाल रतलाम के एक कॉलेज में अध्यापन कर रहे हैं।",
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"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> उत्कर्ष</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 01/09/1995</bdi> | पटना, बिहार</span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": "नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय। मूल नाम : उत्कर्ष जन्म : 01/09/1995 | पटना, बिहार ",
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"description": "<p style=\"text-align: center; font-size: 24px;\"> The Great Poets and Writers in Indian and World History! </p>",
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