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"bio": "<div class=\"text-justify m-bot-10 contents-box\">\n<p class=\"No_indent\"><strong>जन्म: </strong>फरवरी 1957, विद्यालय रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त 1956<br/>\n<strong>शिक्षा: </strong>वैश्य इण्टर कॉलिज, शामली, मुज़फ्फरनगर</p>\n<ul>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">बी. एससी. (हिन्दु कॉलिज, मुरादाबाद)</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">मर्चेन्ट बैंकिंग (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मर्चेंट बैंकिंग, दिल्ली)</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सपोर्ट मैनेजमेंट, चेन्नई)</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">मानव संसाधन विकास (नेशनल कौंसिल फॉर लेबर मैनेजमेंट, चेन्नई)</p>\n</li>\n</ul>\n<p class=\"No_indent\"><strong>संपादन: </strong></p>\n<ul>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसियेशन की पत्रिका \"स्मारिका\"</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">डॉ हनुमंत रनखाम्ब पर केन्द्रित \"कल्पान्त\" का विशेषांक</p>\n</li>\n</ul>\n<p class=\"No_indent\"><strong>प्रकाशन:</strong></p>\n<p class=\"No_indent\"><strong>प्रकाशित पुस्तकें -</strong></p>\n<ul>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">मेरी उड़ान,</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">सच्चाई का परिचय पत्र,</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">मुझे इंसान बना दो,</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">सुबह सवेरे,</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">दलित चेतना के उभरते स्वर</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">जतन से ओढ़ी चदरिया (अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध वर्ष 2009 पर वृद्ध भारत का साक्ष्य),</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">चिंतन बिंदु हिन्दू राष्ट्र भारत (निबंधों का संग्रह)</p>\n</li>\n</ul>\n<p class=\"No_indent\"><strong>विशेष:</strong> कल्पांत पत्रिका का विशेषांक -साहित्य का कीर्तिवर्धन -प्रकाशित व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर \"सुरसरि\" का विशेषांक<br/>\n<strong>अनुवाद: </strong></p>\n<ul>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">सुबह सवेरे का मैथिलि में अनुवाद व प्रकाशन</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">मुझे इंसान बना दो का उर्दू में अनुवाद</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">सच्चाई का परिचय पत्र का कन्नड़ में अनुवाद</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">अनेक रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद व \"वर्ल्ड ऑफ़ पोएट्री\" प्रकाशन</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">अनेक रचनाओं का तमिल, अंगिका व अन्य भाषाओं में अनुवाद</p>\n</li>\n<li>\n<p class=\"No_indent\">विभिन्न कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद व \"world of poetry\" प्रकाशनाधीन</p>\n</li>\n</ul>\n<p class=\"No_indent\"><strong>पत्र वाचन: </strong>अनेक विषयों पर पत्र वाचन (लगभग 12)<br/>\n<strong>सम्मान एवं उपाधियाँ: </strong>80 से अधिक सम्मान व उपाधियाँ, प्रशस्ति पत्र, विद्यावाचस्पति (doctorate) एवं विद्यासागर (d.lit) की उपाधि सहित<br/>\n<strong>संप्रति: </strong>1980 से नैनीताल बैंक लि. में सेवारत, वर्तमान में बैंक की मुज़फ्फरनगर शाखा में<br/>\n<strong>अन्य: </strong>ट्रेड यूनियन लीडर, समाज सेवी, अनेको संस्थाओं से जुड़ाव व पदाधिकारी, अनेक पत्रिकाओं में सहयोगी सम्पादक, सम्पादक मंडल सदस्य, प्रदेश संयोजक, आदि</p>\n<div class=\"addthis_inline_share_toolbox\"></div>\n</div>",
"raw_bio": " जन्म: फरवरी 1957, विद्यालय रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त 1956 शिक्षा: वैश्य इण्टर कॉलिज, शामली, मुज़फ्फरनगर बी. एससी. (हिन्दु कॉलिज, मुरादाबाद) मर्चेन्ट बैंकिंग (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मर्चेंट बैंकिंग, दिल्ली) एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सपोर्ट मैनेजमेंट, चेन्नई) मानव संसाधन विकास (नेशनल कौंसिल फॉर लेबर मैनेजमेंट, चेन्नई) संपादन: नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसियेशन की पत्रिका \"स्मारिका\" डॉ हनुमंत रनखाम्ब पर केन्द्रित \"कल्पान्त\" का विशेषांक प्रकाशन: प्रकाशित पुस्तकें - मेरी उड़ान, सच्चाई का परिचय पत्र, मुझे इंसान बना दो, सुबह सवेरे, दलित चेतना के उभरते स्वर जतन से ओढ़ी चदरिया (अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध वर्ष 2009 पर वृद्ध भारत का साक्ष्य), चिंतन बिंदु हिन्दू राष्ट्र भारत (निबंधों का संग्रह) विशेष: कल्पांत पत्रिका का विशेषांक -साहित्य का कीर्तिवर्धन -प्रकाशित व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर \"सुरसरि\" का विशेषांक अनुवाद: सुबह सवेरे का मैथिलि में अनुवाद व प्रकाशन मुझे इंसान बना दो का उर्दू में अनुवाद सच्चाई का परिचय पत्र का कन्नड़ में अनुवाद अनेक रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद व \"वर्ल्ड ऑफ़ पोएट्री\" प्रकाशन अनेक रचनाओं का तमिल, अंगिका व अन्य भाषाओं में अनुवाद विभिन्न कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद व \"world of poetry\" प्रकाशनाधीन पत्र वाचन: अनेक विषयों पर पत्र वाचन (लगभग 12) सम्मान एवं उपाधियाँ: 80 से अधिक सम्मान व उपाधियाँ, प्रशस्ति पत्र, विद्यावाचस्पति (doctorate) एवं विद्यासागर (d.lit) की उपाधि सहित संप्रति: 1980 से नैनीताल बैंक लि. में सेवारत, वर्तमान में बैंक की मुज़फ्फरनगर शाखा में अन्य: ट्रेड यूनियन लीडर, समाज सेवी, अनेको संस्थाओं से जुड़ाव व पदाधिकारी, अनेक पत्रिकाओं में सहयोगी सम्पादक, सम्पादक मंडल सदस्य, प्रदेश संयोजक, आदि ",
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"name": "अंकित सोमवंशी",
"bio": "<div class=\"text-justify m-bot-10 contents-box\">\n<p class=\"No_indent\">बम्टापुर चिल्लौर, थाना - सांडी, ज़िला - हरदोई (उत्तर प्रदेश)</p>\n<p class=\"No_indent\"> </p>\n<div class=\"addthis_inline_share_toolbox\"></div>\n</div>",
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"bio": "Ibrahim Khan Ghauri (20 July 1951 – 16 January 2022) was an Indian Hindi and Urdu poet, journalist, actor and film lyricist. He wrote under the pen name Ashk. He is popular for his lyrics in Hritik Roshan's debut film, Kaho Naa Pyaar Hai. Ashk is well known as a lyricist, and script writer of some well-known films and TV serials. He wrote more than 700 ghazals that were sung by various popular ghazal singers such as Talat Aziz, Jagjit Singh, Chandan Das, Pankaj Udhas, Penaz Masani, Anuradha Paudhwal, Bhupinder Mitali and others in the 80s and 90s.\r\nIbrahim Ashk was born on July 20, 1951, at Ujjain, Madhya Pradesh. Ashk's early education was at Badnagar, Ujjain district, Madhya Pradesh. He received his B.A. from Indore University in 1973, and his M.A. in Hindi Literature from Indore University in 1974.\r\nAshk penned the lyrics for a number of songs used in Bollywood films, including \"Kaho Naa Pyar Hai\", \"Koi Mil Gaya\", \"Janasheen\", \"Eitbaar\", \"Aap Mujhe Achche Lagne Lage\", \"Krrish\", \"Koi Mere Dil Se Pooche\", and \"Dhund\". He also acted in a serial penned by himself.\r\n\r\nAshk died of complications from COVID-19 in Mumbai on 16 January 2022, at the age of 70.",
"raw_bio": "Ibrahim Khan Ghauri (20 July 1951 – 16 January 2022) was an Indian Hindi and Urdu poet, journalist, actor and film lyricist. He wrote under the pen name Ashk. He is popular for his lyrics in Hritik Roshan's debut film, Kaho Naa Pyaar Hai. Ashk is well known as a lyricist, and script writer of some well-known films and TV serials. He wrote more than 700 ghazals that were sung by various popular ghazal singers such as Talat Aziz, Jagjit Singh, Chandan Das, Pankaj Udhas, Penaz Masani, Anuradha Paudhwal, Bhupinder Mitali and others in the 80s and 90s.\r Ibrahim Ashk was born on July 20, 1951, at Ujjain, Madhya Pradesh. Ashk's early education was at Badnagar, Ujjain district, Madhya Pradesh. He received his B.A. from Indore University in 1973, and his M.A. in Hindi Literature from Indore University in 1974.\r Ashk penned the lyrics for a number of songs used in Bollywood films, including \"Kaho Naa Pyar Hai\", \"Koi Mil Gaya\", \"Janasheen\", \"Eitbaar\", \"Aap Mujhe Achche Lagne Lage\", \"Krrish\", \"Koi Mere Dil Se Pooche\", and \"Dhund\". He also acted in a serial penned by himself.\r \r Ashk died of complications from COVID-19 in Mumbai on 16 January 2022, at the age of 70.",
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"name": "अमृतलाल नागर",
"bio": "<p>अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के गोकुलपुरा में एक गुजराती ब्राह्मण परिवार में हुआ। पिता का नाम राजाराम नागर और माता का नाम विद्यावती नागर था। बाल्यकाल में ही कांग्रेस की वानर सेना के सक्रिय सदस्य बन गए थे और अँग्रेज़ सरकार विरोधी गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाने लगे थे। आरंभिक शिक्षा-दीक्षा के बाद उन्होंने इतिहास, पुरातत्व और समाजशास्त्र का अध्ययन किया। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही बहुभाषी भी थे और हिंदी के अतिरिक्त मराठी, गुजराती, बांग्ला एवं अँग्रेज़ी भाषा का ज्ञान रखते थे। <br><br>अमृतलाल नागर को साहित्यिक संस्कार पारिवारिक वातावरण में प्राप्त हुआ। युवावस्था से ही सक्रिय लेखन की ओर मुड़ गए थे और इस क्रम में उनका पहला कहानी-संग्रह ‘वाटिका’ 1935 में ही प्रकाशित हो गया था। उन्होंने एक स्वतंत्र लेखक और पत्रकार के रूप में कार्य-जीवन का आरंभ किया था। पहले कोल्हापुर से प्रकाशित होने वाले पत्र ‘चकल्लस’ का संपादन किया, फिर हिंदी सिनेमा में पटकथा-लेखन से जुड़ गए। उन्होंने कुछ वर्ष ऑल इंडिया रेडियो पर ड्रामा प्रोड्यूसर के रूप में भी कार्य किया। उस समय ऑल इंडिया रेडियो के सलाहकार मंडल में हिंदी साहित्य के भगवतीचरण वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, उदयशंकर भट्ट और पंडित नरेंद्र शर्मा जैसे महत्त्वपूर्ण साहित्यकार शामिल थे। बाद में फिर रेडियो से अवकाश लेते हुए वह स्वतंत्र साहित्य सृजन में जुट गए। <br><br>एक साहित्यकार के रूप में अमृतलाल नागर ने अपने समय-समाज-संस्कृति से सार्थक संवाद किया है। उन्होंने गद्य की विभिन्न विधाओं—उपन्यास, कहानी, नाटक, बाल साहित्य, फ़िल्म पटकथा, लेख, संस्मरण आदि में विपुल योगदान किया है। उनकी विशेष ख्याति एक उपन्यासकार के रूप में है। हिंदी उपन्यास की परंपरा में उन्हें प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु, नागार्जुन, यशपाल की श्रेणी में रखकर देखा जाता है। उनके उपन्यासों का वितान वृहत है जहाँ उन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति से लेकर तुलसी-सूर जैसी विलक्षण काव्यात्माओं और स्वतंत्रता-पूर्व भारत के राजनीतिक यथार्थ से लेकर स्वातंत्र्योत्तर भारत के बदलते सामाजिक-आर्थिक अनुभवों तक के विस्तृत भारतीय परिदृश्य पर लेखन किया है। वह अपनी कृतियों में यथार्थपरक दृष्टिकोण से भारतीय जनजीवन का जीवंत रूप प्रस्तुत करने के साथ मनुष्य और मनुष्यता का इतिहास रचते जाते हैं।<br> <br>वह भारतीय जन नाट्य संघ, इंडो-सोवियत कल्चरल सोसाइटी, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, भारतेंदु नाट्य अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान जैसी कई संस्थाओं के सम्मानित सदस्य रहे। उन्होंने मंच और रेडियों के लिए कई नाटकों का निर्देशन किया। भारत सरकार की ओर पद्म भूषण, ‘अमृत और विष’ के लिए साहित्य अकादेमी और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार के साथ ही वह अन्य कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए गए। उनकी कृतियों का अँग्रेज़ी, रुसी आदि विदेशी भाषाओं सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। <br><br>प्रमुख कृतियाँ<br><br>उपन्यास : महाकाल, बूँद और समुद्र, शतरंज के मोहरे, सुहाग के नूपुर, अमृत और विष, सात घूँघट वाला मुखड़ा, एकदा नैमिषारण्ये, मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल, खंजन नयन, बिखरे तिनके, अग्निगर्भा, करवट, पीढ़ियाँ।<br><br>कहानी-संग्रह : वाटिका, अवशेष, तुलाराम शास्त्री, आदमी नहीं! नहीं!, पाँचवाँ दस्ता, एक दिल हज़ार दास्ताँ, एटम बम, पीपल की परी, कालदंड की चोरी, एक दिल हज़ार अफ़साने (संपूर्ण कहानियाँ।)<br><br>व्यंग्य : नवाबी मसनद, सेठ बाँकेमल, कृपया दाएँ चलिए, हम फिदाए लखनऊ, चकल्लस।<br><br>नाटक : युगावतार, बात की बात, चंदन वन, चक्करदार सीढ़ियाँ और अँधेरा, उतार चढ़ाव, नुक्कड़ पार, चढ़त न दूजो रंग।<br><br>बाल साहित्य : नटखट चाची, निंदिया आ जा, बजरंगी नौरंगी, बजरंगी पहलवान, बाल महाभारत, इतिहास झरोखे, बजरंग स्मगलरों के फंदे में, हमारे युग निर्माता, अक़्ल बड़ी या भैंस, सात भाई चंपा, सोमू का जन्मदिन, त्रिलोक विजय।<br><br>अनुवाद : बिसाती (मोपासां की कहानियाँ), प्रेम की प्यास (गुस्ताव फ्लॉवर्ट के नॉवेल मैडम बोवैरी का हिंदी रूपांतरण), काला पुरोहित (एंटन चेखव की कहानियाँ), आँखों देखा गदर (विष्णु भट्ट गोडसे की मराठी कृति का अनुवाद), दो फक्कड़ (कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के तीन गुजराती नाटकों का अनुवाद), सारस्वत (मामा वरेकर के मराठी नाटक का अनुवाद)। <br><br>संपादन : सुनीति, सिनेमा समाचार, अल्लाह दे, चकल्लस, नया साहित्य, सनीचर, प्रसाद।<br> <br>पटकथा और संवाद लेखन : बहुरानी, संगम, कुँवारा बाप, उलझन, राजा, पराया धन, किसी से न कहना, कल्पना, गुंजन, चोर।<br><br>रचनावली और अन्य संग्रह : अमृत मंथन (अमृतलाल नागर के साक्षात्कार), अमृतलाल रचनावली (12 खंडों में, सं। शरद नागर), फ़िल्मक्षेत्रे रंगक्षेत्रे (फ़िल्म, रंगमंच, रेडियो नाटकों पर लेख), अत्र कुशलं तत्रास्तु (अमृतलाल नागर और रामविलास शर्मा के निजी पत्र), अमृतलाल नागर रचना संचयन, संपूर्ण बाल रचनाएँ। <br><br></p>",
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"bio": "<div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> रूपम चोपड़ा</span></p>\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span>महाराष्ट्र</span></p>\r\n</div><div class=\"aboutPoet\">\r\n<p><p>आरसी पेशे से कम्प्यूटर इंजिनीयर हैं और लम्बे आरसे तक सॉफ्टवेयर सर्विस में रहने के बाद शायरी की तरफ मुड़ी हैं | उनकी मादरी ज़बान मराठी है लेकिन वे उर्दू और हिंदी में दोहे, सरसी, ग़ज़लें नज़्में, कविताएं लिखती हैं | बेहद संजीदा शायरी करती हैं , अज़्म और हौसले की बात करती है | </p><p>उनकी शायरी, दोहे और नज़्म एक तरह का ‘पोर्टल’ खोलते हैं । आरसी की रचनाओं का यह ‘पोर्टल’ जहाँ एक तरफ़ आस-पास की तमाम मौजूदगियों की निशानदेही करता है, वहीं दूसरी तरफ़ जाने किस-किस तरह की ना-मौजूदगियों की शिनाख्त़ भी| इन्हीं मौजूद और ना-मौजूद के बीच आरसी की शायरी कभी इश्क़ को इबादत के मुकाम पर ले जाती है तो कभी विज्ञान के सहारे सूफियाना फ़लसफ़ों के अनचिन्हे वरक पलटती है।</p><p> <br/> उनके कलाम की वुसअत सिंगार, वीररस से लेकर विज्ञान, गणित, आधुनिकता की मायानगरी से होते हुए तसव्वुफ़, साधना और मुक्ति के अंतिम सत्य का फासला तय कर जाती है … ”सरे-आईना मेरा अक्स है, पसे-आईना कोई और” की उलझन से परे।<br/></p></p>\r\n</div>",
"raw_bio": " मूल नाम : रूपम चोपड़ा जन्म : महाराष्ट्र आरसी पेशे से कम्प्यूटर इंजिनीयर हैं और लम्बे आरसे तक सॉफ्टवेयर सर्विस में रहने के बाद शायरी की तरफ मुड़ी हैं | उनकी मादरी ज़बान मराठी है लेकिन वे उर्दू और हिंदी में दोहे, सरसी, ग़ज़लें नज़्में, कविताएं लिखती हैं | बेहद संजीदा शायरी करती हैं , अज़्म और हौसले की बात करती है | उनकी शायरी, दोहे और नज़्म एक तरह का ‘पोर्टल’ खोलते हैं । आरसी की रचनाओं का यह ‘पोर्टल’ जहाँ एक तरफ़ आस-पास की तमाम मौजूदगियों की निशानदेही करता है, वहीं दूसरी तरफ़ जाने किस-किस तरह की ना-मौजूदगियों की शिनाख्त़ भी| इन्हीं मौजूद और ना-मौजूद के बीच आरसी की शायरी कभी इश्क़ को इबादत के मुकाम पर ले जाती है तो कभी विज्ञान के सहारे सूफियाना फ़लसफ़ों के अनचिन्हे वरक पलटती है। उनके कलाम की वुसअत सिंगार, वीररस से लेकर विज्ञान, गणित, आधुनिकता की मायानगरी से होते हुए तसव्वुफ़, साधना और मुक्ति के अंतिम सत्य का फासला तय कर जाती है … ”सरे-आईना मेरा अक्स है, पसे-आईना कोई और” की उलझन से परे। ",
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"name": "अंकुश कुमार",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-गद्यकार। 'हिंदीनामा' के संस्थापक-संपादक।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> अंकुश कुमार</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 08/07/1994</bdi> | बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p><p>उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले के छोटे से गाँव परतापुर से संबंध रखने वाले अंकुश कुमार साहित्य के प्रचार-प्रसार में बेहद सक्रिय संस्था 'हिंदीनामा' के संस्थापक-संपादक हैं। पढ़ाई-लिखाई से इंजीनियर अंकुश मन से एक कवि हैं, हिंदी से लगाव के कारण इंजीनियरिंग के बाद हिंदी में ही अपने करियर की शुरुआत की। कई प्रकाशकों के साथ वह सोशल मीडिया एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं जिनमें राजपाल एंड संस, हिन्द युग्म और वाणी प्रकाशन प्रमुख हैं। इसके अलावा 'हिंदीनामा' के ज़रिए अंकुश ने बहुत जगहों पर उपस्थिति दर्ज कराई है, जैसे : Rajasthan International Film Festival, IIT Kanpur, IIT Delhi. इसके अलावा अंकुश अपनी टीम के साथ IIT कानपुर के TEDx इवेंट का भी हिस्सा बन चुके हैं। उनकी कविताओं की पहली किताब 'आदमी बनने के क्रम' में (2022) शीर्षक से प्रकाशित हो चुकी है।</p",
"raw_bio": "नई पीढ़ी के कवि-गद्यकार। 'हिंदीनामा' के संस्थापक-संपादक। मूल नाम : अंकुश कुमार जन्म : 08/07/1994 | बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले के छोटे से गाँव परतापुर से संबंध रखने वाले अंकुश कुमार साहित्य के प्रचार-प्रसार में बेहद सक्रिय संस्था 'हिंदीनामा' के संस्थापक-संपादक हैं। पढ़ाई-लिखाई से इंजीनियर अंकुश मन से एक कवि हैं, हिंदी से लगाव के कारण इंजीनियरिंग के बाद हिंदी में ही अपने करियर की शुरुआत की। कई प्रकाशकों के साथ वह सोशल मीडिया एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं जिनमें राजपाल एंड संस, हिन्द युग्म और वाणी प्रकाशन प्रमुख हैं। इसके अलावा 'हिंदीनामा' के ज़रिए अंकुश ने बहुत जगहों पर उपस्थिति दर्ज कराई है, जैसे : Rajasthan International Film Festival, IIT Kanpur, IIT Delhi. इसके अलावा अंकुश अपनी टीम के साथ IIT कानपुर के TEDx इवेंट का भी हिस्सा बन चुके हैं। उनकी कविताओं की पहली किताब 'आदमी बनने के क्रम' में (2022) शीर्षक से प्रकाशित हो चुकी है।",
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"name": "आभा बोधिसत्व",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> आभा बोधिसत्व</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 18/09/1969</bdi> | हावड़ा, पश्चिम बंगाल</span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": "इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री। मूल नाम : आभा बोधिसत्व जन्म : 18/09/1969 | हावड़ा, पश्चिम बंगाल ",
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"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।</p> ",
"raw_bio": "नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक। ",
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"name": "आग्नेय",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">हिंदी के समादृत कवि-लेखक। बतौर अनुवादक भी चर्चित। ‘सदानीरा’ पत्रिका के संस्थापक-संपादक।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">मूल नाम :</span><span> आग्नेय</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 24/01/1935</bdi> | सागर, मध्य प्रदेश</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 26/08/2023</bdi> | गुरुग्राम, हरियाणा</span\r\n</div> <br> <p",
"raw_bio": "हिंदी के समादृत कवि-लेखक। बतौर अनुवादक भी चर्चित। ‘सदानीरा’ पत्रिका के संस्थापक-संपादक। मूल नाम : आग्नेय जन्म : 24/01/1935 | सागर, मध्य प्रदेश निधन : 26/08/2023 | गुरुग्राम, हरियाणा ",
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"name": "आलम शाह ख़ान",
"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सुप्रसिद्ध कथाकार। पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 31/03/1936</bdi> | उदयपुर, राजस्थान</span\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">निधन :</span><span><bdi id=\"poetDOD\"> 17/04/2003</bdi></span\r\n</div> <br> <p><p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">आलम शाह खान का जन्म 31 मार्च 1936 को उदयपुर में हुआ था। </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">उन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक और उन्नीसवीं सदी की काव्य-कृति ‘वंशभास्कर’ से संबंधित विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके अलावा उन्होंने ‘मीरा: एक लोकतत्विक अध्ययन’ नामक पुस्तक लिखी। </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">प्रोफ़ेसर आलम शाह खान मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे। ‘मीरा चेयर’ के अंतर्गत भी वे प्रोफ़ेसर और आर्ट्स कॉलेज के डीन रहे</span><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">, <span lang=\"HI\">जिसे पहले कॉलेज ऑफ़ सोशल साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज कहा जाता था। राजस्थान सरकार के मानवाधिकार आयोग के सदस्य के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। </span></span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">वे अपनी प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे। वे अपनी प्रतिनिधि पहचान लेखक के रूप में ही मानते थे, और जब किसी ने उन्हें अपनी धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिश की तो उन्हें दुख हुआ। </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा रांगेय राघव पुरस्कार और विशिष्ट साहित्यकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">17 मई</span><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">, <span lang=\"HI\">2003 को आलमशाह खान का निधन हो गया।</span></span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><strong><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">रचनाएँ:</span></strong><strong></strong<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><strong><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span></strong<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><strong><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">कहानी संग्रह: </span></strong><strong></strong<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><strong><span style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\"> </span></strong<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">परायी प्यास का सुख </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">किराये की कोख </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">एक और सीता </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">एक गधे की जन्मकुंडली </span<p style=\"margin-bottom:0cm;margin-bottom:.0001pt;\"><span lang=\"HI\" style=\"font-size:12.0pt;line-height:107%;font-family:'Mangal',serif;\">साँसों का रेवड़ <span> </span></span</p>",
"raw_bio": "सुप्रसिद्ध कथाकार। पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित। जन्म : 31/03/1936 | उदयपुर, राजस्थान निधन : 17/04/2003 आलम शाह खान का जन्म 31 मार्च 1936 को उदयपुर में हुआ था। उन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक और उन्नीसवीं सदी की काव्य-कृति ‘वंशभास्कर’ से संबंधित विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके अलावा उन्होंने ‘मीरा: एक लोकतत्विक अध्ययन’ नामक पुस्तक लिखी। प्रोफ़ेसर आलम शाह खान मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे। ‘मीरा चेयर’ के अंतर्गत भी वे प्रोफ़ेसर और आर्ट्स कॉलेज के डीन रहे , जिसे पहले कॉलेज ऑफ़ सोशल साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज कहा जाता था। राजस्थान सरकार के मानवाधिकार आयोग के सदस्य के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। वे अपनी प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे। वे अपनी प्रतिनिधि पहचान लेखक के रूप में ही मानते थे, और जब किसी ने उन्हें अपनी धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिश की तो उन्हें दुख हुआ। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा रांगेय राघव पुरस्कार और विशिष्ट साहित्यकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 17 मई , 2003 को आलमशाह खान का निधन हो गया। रचनाएँ: कहानी संग्रह: परायी प्यास का सुख किराये की कोख एक और सीता एक गधे की जन्मकुंडली साँसों का रेवड़ ",
"slug": "alama-saha-khana",
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"bio": "<p class=\"poetDetailPara\">सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।</p> <div class=\"poetProfileDesc\">\r\n<p><span class=\"pPDTitle\">जन्म :</span><span><bdi id=\"poetDOB\"> 15/08/1968</bdi> | मेरठ, उत्तर प्रदेश</span\r\n</div> <br> <p><p><span style=\"font-size:12px;\"><strong>आलोक श्रीवास्तव</strong> (जन्म : 15 अगस्त 1968) का बचपन उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों-क़स्बों में गुज़रा। उन्होंने पहले सात साल ‘धर्मयुग’ में बतौर उपसंपादक काम किया। फिर एक साल देश भर में चर्चित हुए ‘धर्मयुग बिक्री षड्यंत्र’ में दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार तथा 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया प्रकाशन समूह’ के ख़िलाफ़ अदालतों में संघर्ष तथा सर्वोच्च न्यायालय से अंततः विजय। वह पत्रकारिता, इतिहास, दर्शन और अनुवाद में रुचि रखते हैं; और संवाद प्रकाशन नाम के अनूठे प्रकाशन के संचालक-संपादक हैं।</span><br/><span style=\"font-size:12px;\"><br/></span><span style=\"font-size:12px;\"><strong>प्रकाशन :</strong> वेरा उन सपनों की कथा कहो! (कविता-संग्रह, 1996) जब भी वसंत के फूल खिलेंगे (कविता-संग्रह, 2004), यह धरती हमारा ही स्वप्न है! (कविता-संग्रह, 2006), अख़बारनामा : पत्रकारिता का साम्राज्यवादी चेहरा (2004) शहीद भगत सिंह : क्रांति के प्रयोग (कुलदीप नैयर लिखित भगत सिंह की जीवनी का अनुवाद, 2004), विश्व ग्रंथमाला का संपादन।</span><br/><span lang=\"HI\" style=\"line-height:115%;\"></span</p>",
"raw_bio": "सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। जन्म : 15/08/1968 | मेरठ, उत्तर प्रदेश आलोक श्रीवास्तव (जन्म : 15 अगस्त 1968) का बचपन उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों-क़स्बों में गुज़रा। उन्होंने पहले सात साल ‘धर्मयुग’ में बतौर उपसंपादक काम किया। फिर एक साल देश भर में चर्चित हुए ‘धर्मयुग बिक्री षड्यंत्र’ में दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार तथा 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया प्रकाशन समूह’ के ख़िलाफ़ अदालतों में संघर्ष तथा सर्वोच्च न्यायालय से अंततः विजय। वह पत्रकारिता, इतिहास, दर्शन और अनुवाद में रुचि रखते हैं; और संवाद प्रकाशन नाम के अनूठे प्रकाशन के संचालक-संपादक हैं। प्रकाशन : वेरा उन सपनों की कथा कहो! (कविता-संग्रह, 1996) जब भी वसंत के फूल खिलेंगे (कविता-संग्रह, 2004), यह धरती हमारा ही स्वप्न है! (कविता-संग्रह, 2006), अख़बारनामा : पत्रकारिता का साम्राज्यवादी चेहरा (2004) शहीद भगत सिंह : क्रांति के प्रयोग (कुलदीप नैयर लिखित भगत सिंह की जीवनी का अनुवाद, 2004), विश्व ग्रंथमाला का संपादन।",
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"description": "<p style=\"text-align: center; font-size: 24px;\"> The Great Poets and Writers in Indian and World History! </p>",
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